नई दिल्ली, 21 अक्टूबर: अहोई अष्टमी 1 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। यह व्रत विशेष रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सुरक्षा के लिए रखती हैं। करवा चौथ के तीन दिन बाद पड़ने वाली इस अष्टमी को उत्तर भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
व्रत कथा: पौराणिक कथा के अनुसार एक साहूकार की पत्नी ने मिट्टी खोदते समय अनजाने में सेही (साही) के बच्चों को मार दिया था। इसके बाद उसके सातों पुत्रों की एक-एक करके मृत्यु हो गई। दुखी महिला ने एक वृद्धा के कहने पर अहोई माता का व्रत रखा और क्षमा मांगी। मान्यता है कि व्रत के प्रभाव से उसके सातों पुत्र जीवित हो गए। तभी से संतान वाली माताएं अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं।
पूजा विधि: व्रत के दिन महिलाएं निर्जल या फलाहार व्रत रखती हैं। शाम को दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाकर या छपी तस्वीर लगाकर पूजा की जाती है। चित्र में अहोई माता के साथ सेही और उसके बच्चों तथा सात पुत्रों के चित्र बनाए जाते हैं। कथा सुनने के बाद तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। कुछ क्षेत्रों में चांद निकलने के बाद ही व्रत खोलने की परंपरा है।
मान्यता है कि इस व्रत से संतान को हर संकट से रक्षा मिलती है और निःसंतान दंपतियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है।
स्रोत: पौराणिक कथा और लोक परंपरा

