नई दिल्ली, 22 अक्टूबर: छठ पूजा में ठेकुए को महाप्रसाद का दर्जा प्राप्त है। यह गेहूं के आटे, गुड़ और शुद्ध घी से बनने वाला पारंपरिक पकवान है, जो सूर्य देव को अर्पित किए जाने वाले सूप-दौरे की शोभा बढ़ाता है। ठेकुए के बिना छठ का प्रसाद अधूरा माना जाता है और इसे पाने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।
ठेकुआ बनाने की विधि — गेहूं के आटे में गुड़ का शीरा, शुद्ध घी, सौंफ और नारियल का बुरादा मिलाकर कड़ा आटा गूंथा जाता है। फिर लोइयां बनाकर उन्हें लकड़ी के सांचे से दबाया जाता है, जिससे ठेकुए पर सुंदर नक्काशी उभरती है। इन्हें धीमी आंच पर घी या तेल में सुनहरा होने तक तला जाता है। कुछ घरों में ठेकुए को बिना तले भी बनाया जाता है।
ठेकुआ बनाते समय पवित्रता के कड़े नियम अपनाए जाते हैं। रसोई को पहले गाय के गोबर या गंगाजल से लीपकर शुद्ध किया जाता है। प्रसाद बनाने वाला व्यक्ति स्नान करके साफ वस्त्र पहनता है और बनाते समय प्रसाद को चखा नहीं जाता — माना जाता है कि चखा हुआ प्रसाद देवता को अर्पित नहीं हो सकता। ठेकुए को बांस के सूप और दौरे में सजाकर संध्या अर्घ्य के समय घाट पर ले जाया जाता है। अर्घ्य के बाद यही ठेकुआ प्रसाद के रूप में बांटा जाता है और इसे पाना सौभाग्य माना जाता है।
स्रोत: लोक परंपरा, धार्मिक मान्यता

