नई दिल्ली, 24 अक्टूबर: दिवाली का मुख्य पर्व इस बार 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन रात को मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि कार्तिक अमावस्या की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जिस घर में स्वच्छता, दीपों का प्रकाश और श्रद्धा से पूजन होता है, वहां वे निवास करती हैं।
द्रिक पंचांग के अनुसार दिल्ली में लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल शाम करीब 5 बजकर 45 मिनट से रात 7 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। परंपरा के अनुसार लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में करना सबसे शुभ माना गया है, क्योंकि इसी समय मां लक्ष्मी का आगमन होता है। पूजन से पहले घर की सफाई, मुख्य द्वार पर रंगोली और दीपों की पंक्ति सजाने की परंपरा है।
पूजन विधि: चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। कलश, सुपारी, सिक्के, कमल का फूल, बताशे और मिठाई अर्पित करें। घी का दीया और धूप जलाकर लक्ष्मी चालीसा या श्री सूक्त का पाठ करें। व्यापारी वर्ग इस दिन बही-खातों का पूजन भी करते हैं, जिसे चोपड़ा पूजन कहा जाता है। पूजन के बाद घर के हर कोने में दीया जलाकर अंधकार दूर करने की परंपरा है।
मान्यता है कि दिवाली की रात जुआ या वाद-विवाद से बचना चाहिए और घर में शांति बनाए रखनी चाहिए। पांच दिवसीय दीपोत्सव धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज पर समाप्त होता है। स्रोत: द्रिक पंचांग और धार्मिक मान्यता

