नई दिल्ली, 24 अक्टूबर: शरद पूर्णिमा इस बार 25 अक्टूबर, रविवार को है। इस रात को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। ‘कोजागरी’ शब्द ‘को जागर्ति’ से बना है, जिसका अर्थ है ‘कौन जाग रहा है’। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और पूछती हैं कि कौन जाग रहा है। जो भक्त रात भर जागकर उनकी आराधना करते हैं, उन पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा होती है।
कोजागरी व्रत की कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक साहूकार की दो बेटियां थीं, जिनमें बड़ी बेटी धार्मिक और छोटी लापरवाह थी। शरद पूर्णिमा की रात बड़ी बेटी ने विधिपूर्वक व्रत रखकर रात भर जागरण किया, जबकि छोटी सो गई। मां लक्ष्मी ने जागने वाली बेटी के घर धन-धान्य की वर्षा की। तभी से इस रात जागकर लक्ष्मी पूजन की परंपरा चली आ रही है। यह कथा पीढ़ियों से घर-घर में सुनाई जाती रही है।
बंगाल, असम और मिथिला क्षेत्र में इस दिन कोजागरी लक्ष्मी पूजा का विशेष आयोजन होता है। घरों में अल्पना बनाकर मां लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है और चिवड़ा-नारियल का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों में अमृत बरसता है, इसलिए भक्त रात भर भजन-कीर्तन करते हुए जागते हैं। कुछ स्थानों पर इस रात कौड़ियों से चौपड़ खेलने की भी परंपरा है, जिसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार कोजागरी व्रत से आर्थिक संकट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है। व्रत रखने वाले दिन में उपवास रखते हैं और रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करते हैं। स्रोत: धार्मिक मान्यता और पौराणिक कथा परंपरा

