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करवा चौथ 29 अक्टूबर: सरगी की थाली में क्या-क्या होना चाहिए, जानें परंपरा

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नई दिल्ली, 25 अक्टूबर: करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर को रखा जाएगा और इसकी तैयारी सरगी से शुरू होती है। सरगी वह थाली है जो सास अपनी बहू को व्रत से एक दिन पहले, यानी करवा चौथ की पूर्व संध्या पर देती है। सुहागिनें इसे सूर्योदय से पहले, ब्रह्म मुहूर्त में ग्रहण करती हैं और फिर दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं।

सरगी की थाली में आमतौर पर मिठाई, फल, सूखे मेवे, नारियल, सेवइयां और फेनी रखी जाती है। इसके साथ चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी और सुहाग का सामान भी दिया जाता है। कुछ परिवारों में सरगी में नमकीन मठरी और दूध भी शामिल किया जाता है। मान्यता है कि सरगी का भोजन व्रत के दौरान ऊर्जा बनाए रखता है।

सरगी लेने की परंपरा सास-बहू के रिश्ते से जुड़ी है। सास अपनी बहू के सुहाग और लंबी उम्र की कामना के साथ यह थाली देती है। जिनकी सास नहीं हैं, वे परिवार की किसी बड़ी महिला से सरगी ले सकती हैं। कुछ जगहों पर बहुएं खुद भी सरगी तैयार करती हैं।

सरगी सूर्योदय से पहले ही खानी चाहिए, क्योंकि सूर्योदय के बाद व्रत शुरू हो जाता है। सरगी खाते समय हल्का और पौष्टिक भोजन लेना अच्छा माना जाता है, ताकि दिनभर का निर्जला व्रत आसानी से बीत सके। सरगी के बाद सुहागिनें सोलह श्रृंगार करती हैं और शाम को करवा चौथ की कथा सुनती हैं।

स्रोत: धार्मिक मान्यता और लोक परंपरा