नई दिल्ली, 28 अक्टूबर: शादी के बाद पहली करवा चौथ हर नई दुल्हन के लिए खास होती है, लेकिन साथ ही मन में कई सवाल भी होते हैं। सरगी कब खानी है, पूजा कैसे करनी है और चांद देखने तक क्या-क्या ध्यान रखना है — इन बातों को पहले से जान लेने से व्रत सहज हो जाता है।
पहली करवा चौथ पर सरगी सास की ओर से दी जाती है। इसे सूर्योदय से पहले खा लेना चाहिए। सरगी में हल्का और पौष्टिक भोजन लेना अच्छा रहता है, ताकि दिनभर ऊर्जा बनी रहे। सरगी के बाद व्रत निर्जला रखा जाता है, यानी न अन्न और न जल। अगर किसी को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो तो परिवार के बुजुर्गों और डॉक्टर की सलाह से ही निर्णय लेना चाहिए।
शाम को सोलह शृंगार करके पूजा की थाली तैयार करें। थाली में करवा, छलनी, दीपक, रोली, मिठाई, फल और सुहाग का सामान रखें। परिवार की अन्य महिलाओं के साथ बैठकर व्रत कथा सुनें। कथा सुनना इस व्रत का अहम हिस्सा माना जाता है।
चांद निकलने पर छलनी से चांद देखें, फिर पति का चेहरा देखें और उनके हाथ से जल पीकर व्रत खोलें। नई दुल्हनों के लिए सबसे बड़ी सलाह यही है कि घबराएं नहीं, धीरे-धीरे हर विधि करें और परिवार की परंपरा का पालन करें। पहली करवा चौथ की यादें जीवनभर खास रहती हैं, इसलिए इसे तनाव नहीं, उत्सव की तरह मनाएं।
स्रोत: धार्मिक मान्यता व पारिवारिक परंपरा

