नई दिल्ली, 28 अक्टूबर: अहोई अष्टमी का व्रत रविवार, 1 नवंबर 2026 को रखा जाएगा। यह व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। करवा चौथ के तीन दिन बाद आने वाला यह पर्व उत्तर भारत में विशेष आस्था के साथ मनाया जाता है।
अहोई अष्टमी की व्रत कथा में एक माता की कहानी प्रचलित है, जिसने अनजाने में हुई भूल के लिए पश्चाताप किया और अहोई माता की पूजा से उसे संतान सुख का आशीर्वाद मिला। इसी मान्यता के कारण इस दिन माताएं अहोई माता का चित्र बनाकर या उनका चित्र स्थापित करके पूजा करती हैं। पूजा में करवा, सिंघाड़े, मिठाई, फूल और दीपक रखे जाते हैं।
इस दिन महिलाएं दिनभर उपवास रखती हैं और शाम को तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। कुछ स्थानों पर चांद निकलने के बाद व्रत खोलने की भी परंपरा है। पूजा के दौरान अहोई माता की कथा सुनना और बच्चों के नाम से आशीर्वाद मांगना इस व्रत की प्रमुख परंपरा है।
मान्यता है कि अहोई अष्टमी का व्रत संतान के जीवन की हर बाधा दूर करता है। इस दिन माताएं अपने बच्चों के लिए नई चीजें खरीदकर उन्हें आशीर्वाद स्वरूप देती हैं। राधा कुंड में इस दिन स्नान की भी विशेष मान्यता है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
स्रोत: धार्मिक मान्यता व पंचांग

