नई दिल्ली, 29 अक्टूबर: छठ पूजा का चार दिवसीय महापर्व शुक्रवार, 13 नवंबर से शुरू होगा और सोमवार, 16 नवंबर को उषा अर्घ्य के साथ संपन्न होगा। यह व्रत सूर्य देव और छठी मैया की आराधना के लिए रखा जाता है और इसे सबसे कठिन व्रतों में गिना जाता है, क्योंकि इसमें 36 घंटे का निर्जला उपवास होता है।
पहला दिन नहाय खाय कहलाता है, जो 13 नवंबर को पड़ेगा। इस दिन व्रती स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनते हैं और कद्दू की सब्जी, चने की दाल व भात का सात्विक भोजन करते हैं। दूसरे दिन खरना होता है, जो 14 नवंबर को है। खरना की शाम गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाकर छठी मैया को भोग लगाया जाता है और फिर व्रती 36 घंटे के निर्जला व्रत का संकल्प लेते हैं।
तीसरा दिन संध्या अर्घ्य का होता है, जो रविवार, 15 नवंबर को पड़ेगा। इस दिन व्रती बांस के सूप और दौरा में ठेकुआ, फल और फूल सजाकर नदी या तालाब के किनारे पहुंचते हैं और डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। चौथा और अंतिम दिन उषा अर्घ्य का है, जो सोमवार, 16 नवंबर को होगा। सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
छठ पूजा में शुद्धता और नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है। प्रसाद बनाने से लेकर अर्घ्य देने तक हर काम में पवित्रता बरती जाती है। यही कारण है कि इस पर्व को आस्था का महापर्व कहा जाता है।
स्रोत: पंचांग / धार्मिक मान्यता

