नई दिल्ली, 30 अक्टूबर: अहोई अष्टमी का व्रत इस बार रविवार, 1 नवंबर को रखा जाएगा। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं, लेकिन मथुरा के राधा कुंड का स्नान इस पर्व को एक अलग ही रंग दे देता है। गोवर्धन के पास स्थित राधा कुंड और श्याम कुंड का नाम श्रीकृष्ण और राधा रानी से जुड़ा माना जाता है, और धार्मिक मान्यता के अनुसार अहोई अष्टमी पर यहां स्नान का विशेष फल बताया गया है।
मान्यता है कि अहोई अष्टमी की रात राधा कुंड में स्नान करने से संतान संबंधी मनोकामना पूरी होती है। इसी आस्था के कारण इस दिन दूर-दूर से श्रद्धालु मथुरा पहुंचते हैं और कुंड के किनारे दीपदान करते हैं। कई परिवारों में यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है, जहां दंपती संतान की कामना से इस स्नान में भाग लेते हैं। हालांकि यह पूरी तरह आस्था और मान्यता का विषय है, इसका वैज्ञानिक दावा नहीं किया जाता।
राधा कुंड में स्नान से पहले श्रद्धालु अहोई माता की पूजा करते हैं। पूजा में अहोई माता के चित्र के सामने दीपक जलाया जाता है, रोली-चावल से तिलक किया जाता है और संतान के स्वास्थ्य की कामना की जाती है। व्रत रखने वाली माताएं दिनभर निर्जला या फलाहारी व्रत रखती हैं और शाम को पूजा के बाद ही व्रत खोलती हैं। कुंड परिसर में इस दिन भजन-कीर्तन का माहौल रहता है और घाटों पर दीपों की रोशनी देखने लायक होती है।
यदि आप इस बार राधा कुंड जाने की योजना बना रहे हैं, तो भीड़ को देखते हुए समय से पहुंचना समझदारी होगी। स्नान के दौरान कुंड की स्वच्छता का ध्यान रखें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। बच्चों को साथ ले जा रहे परिवारों को भीड़ वाले घाटों पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। आस्था के साथ सुरक्षा का संतुलन ही इस पर्व की असली सुंदरता है।
स्रोत: धार्मिक मान्यता और मथुरा की स्थानीय परंपरा

