नई दिल्ली, 2 नवंबर: धनतेरस का पर्व इस वर्ष शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा के साथ एक और परंपरा निभाई जाती है, जिसे यम दीपदान कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार धनतेरस की संध्या को घर के मुख्य द्वार पर यमराज के निमित्त दीपक जलाया जाता है।
यम दीपदान की परंपरा का संबंध परिवार की रक्षा और मंगलकामना से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस दिन संध्या के समय दीप जलाने से घर पर आने वाले संकट टलते हैं और परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य बना रहता है। यही कारण है कि कई घरों में धनतेरस की पूजा के बाद सबसे पहले यम का दीपक जलाया जाता है।
विधि की बात करें तो इसके लिए मिट्टी का नया दीपक लेना शुभ माना जाता है। कई परिवार चौमुखी दीपक बनाते हैं, जिसमें चार बातियां लगाई जाती हैं। दीपक में सरसों का तेल भरकर उसे घर के मुख्य द्वार के बाहर, दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है। दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है, इसलिए दीपक का मुख भी उसी ओर रखना परंपरा का हिस्सा है।
दीपक जलाने से पहले उसे रोली और अक्षत से पूजना चाहिए। कुछ परिवार दीपक में एक कौड़ी या तांबे का सिक्का भी रखते हैं। इसके बाद परिवार के सदस्य यमराज से प्रार्थना करते हैं कि घर के सभी लोग स्वस्थ और सुरक्षित रहें। दीपक को रात भर जलता रहने देना शुभ माना जाता है, हालांकि सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।
दिल्ली के लिए धनतेरस की पूजा का मुहूर्त शाम 6 बजकर 2 मिनट से रात 7 बजकर 58 मिनट तक बताया गया है, जबकि प्रदोष काल शाम 5 बजकर 32 मिनट से रात 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। यम दीपदान प्रदोष काल में ही करना उत्तम माना जाता है। दूसरे शहरों में समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है, इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि अवश्य करें।
स्रोत: पंचांग और धार्मिक मान्यता

