मयंक त्रिगुण, वरिष्ठ संवाददाता –
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (Jaypee Infratech Ltd) के प्रबंध निदेशक मनोज गौड़ को गिरफ्तार कर लिया है. यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और घर खरीदारों के पैसे की हेराफेरी से जुड़े एक बड़े मामले में की गई है. ईडी का आरोप है कि जेपी एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) और उससे जुड़ी कंपनियों ने मनोज गौड़ के जरिए लगभग 12,000 करोड़ रुपये की गड़बड़ी की है.
खरीदारों के पैसों का कथित दुरुपयोग
ED का आरोप है कि जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड ने अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में घर खरीदारों से लिए गए पैसे को अन्य परियोजनाओं में लगाया और उनका गलत इस्तेमाल किया. इस धोखाधड़ी में कई निवेशकों का पैसा अटका हुआ है और उन्हें अभी तक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.
साल 2017 में भी कई एफआईआर दर्ज की गई थीं, जब घर खरीदारों ने बिल्डर के खिलाफ प्रदर्शन किया था और आरोप लगाया था कि उनके पैसे का गलत इस्तेमाल किया गया. ED की जांच में अब यह साफ होने की कोशिश की जा रही है कि इस मामले में कितनी गड़बड़ी हुई और जिम्मेदार कौन हैं. मनोज गौड़ की गिरफ्तारी के बाद ED की जांच और तेज हो सकती है. एजेंसी अब संपत्तियों की अटैचमेंट और फाइनेंशियल ट्रैकिंग के माध्यम से पूरे मामले की पड़ताल कर रही है.
मई 2025 में हुई थी बड़ी छापेमारी
इस साल मई 2025 में ED ने मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA) के तहत जेपी इंफ्राटेक, जेपी एसोसिएट्स और उनसे जुड़ी कंपनियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी. एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान दिल्ली, मुंबई और अन्य प्रमुख शहरों में लगभग 15 जगहों पर कार्रवाई की गई थी.
23 मई 2025 को हुई इस छापेमारी में एजेंसी ने महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और बैंक रिकॉर्ड जब्त किए थे. साथ ही 1.70 करोड़ रुपये की नकदी भी ED ने अपने कब्जे में ली थी
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