यूपी सरकार ने की 21% की बंपर वेतन वृद्धि, जानिए अब श्रमिकों को मिलेगी कितनी सैलरी

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मयंक त्रिगुण, ब्यूरो चीफ 

सब-हेडलाइन: 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी नई मजदूरी दर। गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) और गाजियाबाद के श्रमिकों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा। 20 हजार न्यूनतम वेतन की खबरों को सरकार ने बताया भ्रामक।

नोएडा/लखनऊ:

दिल्ली से सटे गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में सोमवार को हुए हिंसक प्रदर्शनों के बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने श्रमिकों को बड़ी राहत दी है। राज्य सरकार ने श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में 21 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी करने का अहम ऐलान किया है। बढ़ी हुई मजदूरी की ये नई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी।

किस जिले में कितनी बढ़ी मजदूरी?

मजदूरी में यह वृद्धि अलग-अलग जिलों की श्रेणी के आधार पर की गई है:

  • गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) और गाजियाबाद: यहाँ के श्रमिकों की मजदूरी में सबसे अधिक 21 प्रतिशत का इजाफा किया गया है।
  • अन्य नगर निगम वाले जिले: इन जिलों में मजदूरी की अंतरिम दरें 15 प्रतिशत बढ़ाई गई हैं।
  • शेष जिले: राज्य के बाकी अन्य जिलों में मजदूरी में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय लिया गया है।

मजदूरी का नया स्ट्रक्चर: पुरानी vs नई दरें (नोएडा-गाजियाबाद)

वर्तमान में पूरे प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी की दरें एक समान हैं, लेकिन नई दरों के लागू होने के बाद नोएडा और गाजियाबाद के श्रमिकों की सैलरी का नया स्लैब इस प्रकार होगा:

श्रमिक श्रेणीवर्तमान मासिक वेतन (पूरे यूपी में)वर्तमान दिहाड़ीनया मासिक वेतन (नोएडा-गाजियाबाद)
अकुशल (Unskilled)₹11,313₹435.14₹13,690
अर्द्धकुशल (Semi-skilled)₹12,445₹478.69₹15,059
कुशल (Skilled)₹13,940₹536.16₹16,868

20,000 रुपये न्यूनतम वेतन की खबर ‘भ्रामक’

सोशल मीडिया और इंटरनेट पर तेजी से फैल रही उन खबरों को प्रदेश सरकार ने पूरी तरह से भ्रामक और फर्जी करार दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि सरकार ने न्यूनतम मजदूरी 20,000 रुपये प्रतिमाह तय कर दी है। सरकार ने आम जनता और श्रमिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें।

आगे की रणनीति: अगले माह होगा वेज बोर्ड का गठन

श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकार नए श्रम कानूनों के तहत श्रमिकों के हित में निरंतर और आवश्यक कार्य कर रही है। इसी कड़ी में अगले महीने एक नए ‘वेज बोर्ड’ (Wage Board) का गठन किया जाएगा। इस बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर भविष्य में न्यूनतम वेतन के स्थायी निर्धारण की प्रक्रिया भी जल्द ही प्रारंभ की जाएगी।