बिजनौर से एक बेहद खौफनाक और पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली खबर सामने आई है। न्याय न मिलने से बुरी तरह टूट चुकी एक बिजनौर दुष्कर्म पीड़िता ने रविवार देर रात शहर कोतवाली के अंदर ही खुद पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा ली। बताया जा रहा है कि आग की लपटों से घिरी हुई यह युवती दर्द से तड़पते हुए सीधे कोतवाल के कक्ष तक पहुंच गई, जिसे देखकर रात की ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए और थाने में भारी अफरा-तफरी मच गई।
आनन-फानन में पुलिस वालों ने कंबल और पानी की मदद से किसी तरह आग बुझाई और उसे तुरंत पास के अस्पताल ले गए। लेकिन तब तक आग ने उसे बुरी तरह अपनी चपेट में ले लिया था। चिकित्सकों के अनुसार युवती लगभग 60 प्रतिशत तक झुलस चुकी है। उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर और सघन इलाज के लिए मेरठ के एक उच्च चिकित्सा केंद्र में रेफर कर दिया है। पुलिस थाने के अंदर हुई यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
आरोपी फौजी पर कार्रवाई न होने से परेशान थी बिजनौर दुष्कर्म पीड़िता
असल में, इस पूरे खौफनाक कदम के पीछे एक लंबी कानूनी खींचतान और सिस्टम की सुस्ती की कहानी है। किरतपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली इस युवती का आरोप है कि सेना में कार्यरत एक युवक ने उसके साथ दुष्कर्म किया है। इंसाफ की आस में वह लंबे समय से पुलिस के चक्कर काट रही थी और उसने आरोपी के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर भी दर्ज कराई थीं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जब पहले मामले की तफ्तीश हुई, तो उसमें आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिल पाए थे। इसके बाद भी युवती ने हार नहीं मानी और दूसरी प्राथमिकी दर्ज करवा दी।
लेकिन यहां भी कानूनी पेंच उसके आड़े आ गया। बताया गया कि इस बीच आरोपी फौजी ने न्यायालय की शरण ली और वहां से अपनी गिरफ्तारी पर रोक (स्टे) लगाने का आदेश प्राप्त कर लिया। अदालत से राहत मिलने के बाद आरोपी पक्ष निश्चिंत था, जबकि पीड़ित युवती लगातार पुलिस से कार्रवाई की गुहार लगा रही थी। उसे महसूस हो रहा था कि उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है और आरोपी खुलेआम घूम रहा है।
रविवार शाम कोतवाली में आखिर ऐसा क्या हुआ?
घटना वाले दिन यानी रविवार की शाम युवती अपनी इसी शिकायत को लेकर एक बार फिर बिजनौर शहर कोतवाली पहुंची थी। वह काफी देर तक पुलिस अधिकारियों के साथ मामले को लेकर चर्चा और बहस कर रही थी। स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार, वह इस बात पर अड़ी थी कि आरोपी पक्ष को तुरंत थाने बुलाया जाए और आमने-सामने बिठाकर बात की जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
ड्यूटी पर मौजूद कोतवाल ने उसे काफी समझाने का प्रयास किया और आश्वासन दिया कि सोमवार को आरोपी पक्ष को थाने बुलवाया जाएगा। लेकिन महीनों की हताशा, मानसिक तनाव और न्याय न मिलने का दर्द उस वक्त युवती पर इस कदर हावी हो गया कि उसने पुलिस की बात मानने से इनकार कर दिया। बातचीत के कुछ ही देर बाद, उसने अचानक अपने ऊपर पेट्रोल उड़ेल लिया और खुद को आग के हवाले कर दिया।
एसपी ने दिए जांच के आदेश, नपेगी लापरवाही
कोतवाली जैसे अति-सुरक्षित माने जाने वाले परिसर में आत्मदाह की इस घटना ने पुलिस के आला अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक (एसपी) अभिषेक झा देर रात ही लाव-लश्कर के साथ कोतवाली पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जानकारी ली। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसपी ने इस पूरे प्रकरण की जांच तत्काल प्रभाव से नगर पुलिस अधीक्षक (एसपी सिटी) को सौंप दी है और उनसे जल्द से जल्द रिपोर्ट तलब की है।
एसपी ने स्पष्ट किया है कि केवल दुष्कर्म के मामले की ही नहीं, बल्कि इस बात की भी गहराई से जांच होगी कि थाने के भीतर ऐसे क्या हालात बने कि एक महिला को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा। अगर इस मामले में किसी भी स्तर पर पुलिसकर्मियों की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, प्रशासन और पुलिस की सबसे पहली प्राथमिकता झुलसी हुई युवती की जान बचाना और उसे बेहतर चिकित्सा मुहैया कराना है। यह घटना एक बार फिर इस कड़वी सच्चाई को उजागर करती है कि जब किसी पीड़ित को सिस्टम से समय पर न्याय नहीं मिलता, तो हताशा में वह अपनी जान तक जोखिम में डालने को मजबूर हो जाता है। अब देखना यह है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद किन लापरवाह पुलिसकर्मियों पर गाज गिरती है।