पुणे: केतन अग्रवाल मर्डर केस में खौफनाक खुलासे, गूगल से सीखा हत्या का तरीका और किले पर की रिहर्सल
महाराष्ट्र के पुणे से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म की याद दिला दी है। शहर के जाने-माने रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या (Ketan Agarwal Murder Case) की गुत्थी जैसे-जैसे सुलझ रही है, वैसे-वैसे पुलिस के सामने कई चौंकाने वाले सच आ रहे हैं। असल में, यह कोई अचानक गुस्से में की गई हत्या नहीं थी, बल्कि एक बेहद सोची-समझी और ठंडे दिमाग से रची गई खौफनाक साजिश थी। पुलिस की शुरुआती जांच में यह साफ हो गया है कि आरोपियों ने इस वारदात को अंजाम देने से पहले न सिर्फ वेश बदलने की पूरी प्लानिंग की थी, बल्कि इंटरनेट खंगाल कर मर्डर के नए-नए तरीके भी खोजे थे।
इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रही पुणे ग्रामीण पुलिस के हाथ कई अहम सुराग लगे हैं। बताया जा रहा है कि मुख्य आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी ने वारदात से कई दिन पहले ही हत्या का पूरा खाका तैयार कर लिया था। दोनों के दिमाग में यह साजिश किस कदर हावी थी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एक बार नहीं, बल्कि बाकायदा घटनास्थल पर जाकर मर्डर की पूरी रिहर्सल भी की थी।
गूगल सर्च हिस्ट्री ने खोले खौफनाक राज
दरअसल, तकनीकी जांच के दौरान पुलिस ने जब दोनों आरोपियों के मोबाइल और डिजिटल डिवाइस खंगाले, तो जांच अधिकारियों के भी होश उड़ गए। सिया और चेतन की गूगल सर्च हिस्ट्री से यह पुख्ता हुआ है कि वे इंटरनेट पर लगातार हत्या के अलग-अलग और सटीक तरीके ढूंढ रहे थे। उन्होंने मर्डर को अंजाम देने और उसके बाद पुलिस से बचने के लिए सबूत मिटाने से जुड़े कई वीडियो भी देखे थे। यह पूरी तैयारी इस बात का साफ इशारा करती है कि वे पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए हर मुमकिन पैंतरा आजमा रहे थे।
14 जून को भी रची गई थी मौत की पटकथा
पुलिस की पूछताछ में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। सूत्रों की मानें तो, आरोपियों ने पहली बार 14 जून को भी केतन अग्रवाल को मौत के घाट उतारने की कोशिश की थी। हालांकि, उस दिन हालात शायद उनके पक्ष में नहीं थे या कोई चूक हो गई, जिस वजह से उनका यह खौफनाक मंसूबा नाकाम हो गया था। लेकिन इसके बावजूद दोनों ने हार नहीं मानी और अपनी साजिश को और भी धारदार बनाने में जुट गए।
लोहगढ़ किले पर पुलिस का सीन रिक्रिएशन (Ketan Agarwal Murder Case)
जांच को और पुख्ता करने के लिए हाल ही में पुलिस दोनों आरोपियों—सिया और चेतन को लेकर सीधे लोहगढ़ किले पहुंची, जहां इस पूरी वारदात को अंजाम दिया गया था। पुलिस टीम ने क्राइम सीन को दोबारा से रीक्रिएट (Recreate) करने की कोशिश की ताकि हत्या की बिखरी हुई कड़ियों को सही ढंग से जोड़ा जा सके। जांच अधिकारी यह बारीकी से समझने का प्रयास कर रहे हैं कि आखिर केतन अग्रवाल किस समय उस किले पर पहुंचे थे? चेतन चौधरी वहां पहले से कैसे मौजूद था? स्थानीय लोगों के अनुसार, उस वक्त किले पर ज्यादा भीड़ नहीं थी, जिसका फायदा आरोपियों ने उठाया।
फिलहाल, पुलिस आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही है और क्राइम सीन रिक्रिएशन के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या की घटना किस क्रम में हुई। इस खौफनाक साजिश ने पूरे पुणे शहर में सनसनी फैला दी है और यह एक बार फिर सोचने पर मजबूर करता है कि आपराधिक मानसिकता अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए किस हद तक जा सकती है।