हाइलाइट्स (Highlights):
- रुद्रप्रयाग में लगातार बारिश से अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां उफान पर, प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में।
- मौसम विभाग (IMD) ने 4 जुलाई तक रुद्रप्रयाग सहित कई जिलों में भारी बारिश का ‘ऑरेंज अलर्ट’ किया जारी।
- लैंडस्लाइड और मलबा गिरने के कारण बदरीनाथ और केदारनाथ यात्रा मार्ग प्रभावित, यात्रियों की सुरक्षा के लिए आवागमन पर लगी रोक।
Uttarakhand Weather Update-रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड में मानसून की भारी बारिश अब आफत बनने लगी है। रुद्रप्रयाग जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां उफान पर आ गई हैं। नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गया है। जलस्तर खतरे के निशान की ओर बढ़ने की आशंका ने स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
खतरे के निशान की ओर बढ़ता नदियों का पानी बुधवार सुबह से जारी भारी बारिश के बाद अलकनंदा नदी का जलस्तर मंगलवार के 622 मीटर से बढ़कर 622.5 मीटर तक पहुंच गया है। मंडल स्तर के अधिकारी राजवार ने बताया कि चेतावनी स्तर 626 मीटर और खतरनाक स्तर 627 मीटर निर्धारित है। जलस्तर चेतावनी स्तर के करीब पहुंचते ही वॉट्सऐप ग्रुप्स और लाउडस्पीकर के जरिए अलर्ट जारी किया जाता है। फिलहाल, जिला आपदा नियंत्रण कक्ष दोनों नदियों के जलस्तर पर 24 घंटे नजर रखे हुए है और जोखिम वाले इलाकों में लोगों को सतर्क किया जा रहा है।
मौसम विभाग का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी देहरादून स्थित भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने रुद्रप्रयाग के लिए 4 जुलाई तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके साथ ही नैनीताल, देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल और उधम सिंह नगर जिलों के लिए भी ‘ऑरेंज अलर्ट’ लागू किया गया है। मौसम विभाग ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से नदियों, उफनते नालों और भूस्खलन (लैंडस्लाइड) संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है।
तीर्थयात्रा मार्गों पर लगा ब्रेक, रोके गए वाहन लगातार हो रही बारिश का सीधा असर चारधाम यात्रा पर भी पड़ा है। चमोली जिले में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग और रुद्रप्रयाग में केदारनाथ यात्रा मार्ग पर पहाड़ियों से पत्थर और मलबा गिरने के कारण यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए प्रशासन ने सोनप्रयाग–मुनकटिया मार्ग पर वाहनों और यात्रियों के आवागमन को अस्थायी रूप से रोक दिया है। मौसम साफ होने और मार्ग सुचारू होने के बाद ही यात्रा को आगे बढ़ाया जाएगा।