नई दिल्ली, 27 अक्टूबर: धनतेरस का पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन लोग सोना, चांदी, बर्तन और वाहन खरीदते हैं, लेकिन एक चीज ऐसी भी है जिसे खरीदना धनतेरस की पुरानी परंपरा का हिस्सा माना जाता है और वह है झाड़ू। सुनने में यह साधारण लग सकता है, लेकिन धार्मिक मान्यता में झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है।
मान्यता के अनुसार मां लक्ष्मी उसी घर में निवास करती हैं जहां स्वच्छता होती है। झाड़ू घर की गंदगी और नकारात्मकता को दूर करती है, इसलिए धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदना घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाने का प्रतीक माना जाता है। कई परिवारों में धनतेरस के दिन खरीदी गई झाड़ू को पहले पूजा स्थान पर रखा जाता है और उस पर हल्दी-कुमकुम का तिलक लगाकर मां लक्ष्मी का आशीर्वाद लिया जाता है।
परंपरा यह भी है कि धनतेरस पर लाई गई नई झाड़ू का उपयोग उसी दिन से शुरू नहीं किया जाता, बल्कि उसे अगले दिन या शुभ समय पर काम में लाया जाता है। पुरानी झाड़ू को भी सम्मान के साथ हटाया जाता है, क्योंकि मान्यता है कि झाड़ू पर पैर रखना या उसे अपमानित करना मां लक्ष्मी का अनादर माना जाता है। यही कारण है कि झाड़ू को हमेशा एक निश्चित स्थान पर, सीधा खड़ा करके रखा जाता है।
धनतेरस पर झाड़ू खरीदते समय लोग अक्सर इसे लाल या पीले धागे से बांधकर घर लाते हैं। कुछ घरों में झाड़ू के साथ धनिया, हल्दी या मिठाई भी खरीदी जाती है। यह परंपरा हमें यह सिखाती है कि समृद्धि केवल सोने-चांदी से नहीं आती, बल्कि घर की स्वच्छता, अनुशासन और कृतज्ञता से भी आती है। इसलिए इस धनतेरस झाड़ू की इस छोटी सी परंपरा को भी उतना ही महत्व दें।
स्रोत: पंचांग और धार्मिक मान्यता

