नई दिल्ली, 27 अक्टूबर: दिवाली का पर्व 8 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन घरों में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होती है, लेकिन व्यापारियों के लिए दिवाली का एक और खास महत्व है और वह है चोपड़ा पूजन। चोपड़ा पूजन में व्यापारी अपने नए बही-खाते की पूजा करते हैं और नए व्यापारिक वर्ष की शुरुआत का संकल्प लेते हैं।
परंपरा के अनुसार दिवाली की शाम लक्ष्मी पूजन के समय दुकान या ऑफिस में नई बही-खाता, रजिस्टर या लेजर रखा जाता है। इसे लाल कपड़े में लपेटकर, उस पर स्वास्तिक और शुभ-लाभ लिखकर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और मां सरस्वती की पूजा की जाती है। मान्यता है कि देवी-देवताओं के आशीर्वाद से नया व्यापारिक वर्ष लाभदायक और बाधारहित बीतता है।
चोपड़ा पूजन के समय व्यापारी पुराने खातों को बंद करके नए खातों की शुरुआत करते हैं। इस दौरान कलम-दवात की भी पूजा की जाती है, क्योंकि व्यापार में लेखा-जोखा ईमानदारी का प्रतीक माना जाता है। कई दुकानों में इस दिन ग्राहकों को मिठाई बांटी जाती है और पुराने लेन-देन का हिसाब साफ किया जाता है। यह परंपरा व्यापार में पारदर्शिता और विश्वास का संदेश देती है।
आज के समय में भले ही बही-खाते की जगह कंप्यूटर और डिजिटल रिकॉर्ड ने ले ली हो, लेकिन चोपड़ा पूजन की भावना अब भी उतनी ही जीवित है। कई व्यापारी अब भी दिवाली पर अपने लैपटॉप, रजिस्टर या नए खाता-बही की पूजा करते हैं। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि व्यापार की असली लक्ष्मी ईमानदारी, मेहनत और ग्राहक का भरोसा ही है।
स्रोत: पंचांग और धार्मिक मान्यता

