नई दिल्ली, 15 अक्टूबर: धनतेरस का पर्व इस बार 6 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन धन के देवता कुबेर और आरोग्य के देवता धन्वंतरि की पूजा होती है, लेकिन शाम के समय किया जाने वाला यम दीपदान भी इस पर्व का एक महत्वपूर्ण अंग है। धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस की शाम घर के मुख्य द्वार पर यमराज के नाम का दीप जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार को दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है।
यम दीपदान की विधि सरल है। सूर्यास्त के बाद एक मिट्टी के दीये में सरसों का तेल डालकर बाती लगाएं। इस दीये को घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखें, क्योंकि दक्षिण दिशा यमराज की दिशा मानी जाती है। दीया जलाते समय मन में परिवार की सुरक्षा और दीर्घायु की प्रार्थना करें। कुछ परंपराओं में इस दीये के पास काले तिल भी रखे जाते हैं।
मान्यता है कि यम दीपदान से यमराज प्रसन्न होते हैं और घर के सदस्यों को असामयिक कष्टों से रक्षा मिलती है। यह दीया पूरी रात जलता रहना शुभ माना जाता है, इसलिए पर्याप्त तेल डालें। ध्यान रहे कि यह दीया घर के अंदर नहीं, बल्कि द्वार के बाहर रखा जाता है। धनतेरस की खरीदारी और लक्ष्मी पूजन के साथ-साथ इस छोटी सी परंपरा को निभाने से पर्व की पूर्णता मानी जाती है।
स्रोत: धार्मिक मान्यता / पंचांग

