नई दिल्ली, 15 अक्टूबर: शारदीय नवरात्रि की महा सप्तमी 17 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा होती है। मां कालरात्रि का स्वरूप भयंकर होते हुए भी भक्तों के लिए अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इनकी आराधना से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और साधक को भय से मुक्ति मिलती है। मां कालरात्रि की पूजा विशेष रूप से रात्रि के समय की जाती है, जिसे ‘शुभ निशा’ कहा जाता है।
महा सप्तमी की पूजा विधि में प्रातःकाल स्नान के बाद मां का ध्यान करें और रात्रि में मुख्य पूजन करें। मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाने की परंपरा है, जो आज के दिन का विशेष प्रसाद माना जाता है। इसके साथ ही लाल फूल और दीप अर्पित करें। मान्यता है कि गुड़ का भोग चढ़ाने से जीवन की कड़वाहट दूर होती है और शत्रुओं पर विजय मिलती है।
पूजन के समय ‘ॐ देवी कालरात्र्यै नमः’ मंत्र का जाप करें। आज के दिन नीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार मां कालरात्रि सहस्रार चक्र की अधिष्ठात्री देवी हैं, इसलिए इनकी साधना से आध्यात्मिक उन्नति होती है। बंगाल में महा सप्तमी के दिन नवपत्रिका स्थापना का भी विशेष महत्व है। जो साधक नवरात्रि में कठिन साधना करते हैं, उनके लिए सप्तमी की रात्रि का पूजन विशेष फलदायी माना जाता है।
स्रोत: धार्मिक मान्यता / पंचांग

