नई दिल्ली, 15 अक्टूबर: शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन मां स्कंदमाता को समर्पित है। आज के दिन भक्त माता के इस रूप की पूजा-अर्चना करके संतान सुख, ज्ञान और शांति की कामना करते हैं। मां स्कंदमाता चार भुजाओं वाली देवी हैं, जो सिंह पर विराजमान हैं और अपनी गोद में बाल स्कंद (कार्तिकेय) को लिए हुए हैं। धार्मिक मान्यता है कि इनकी पूजा से साधक का विशुद्ध चक्र जागृत होता है और भक्त को संतान संबंधी चिंताओं से मुक्ति मिलती है।
पूजा विधि की शुरुआत प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके करें। मां की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाएं और सफेद पुष्प, विशेषकर कमल का फूल अर्पित करें। मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाने की परंपरा है, क्योंकि केला इनका प्रिय भोग माना गया है। भोग के साथ मिश्री और पंचामृत भी चढ़ा सकते हैं।
पूजन के समय ‘ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें। ध्यान मंत्र ‘सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया’ का पाठ भी फलदायी माना जाता है। आज के दिन सफेद रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना गया है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से मां स्कंदमाता की आराधना करता है, उसके घर में सुख-शांति बनी रहती है और संतान को दीर्घायु प्राप्त होती है। पूजा के अंत में आरती अवश्य करें और प्रसाद का वितरण करें।
स्रोत: धार्मिक मान्यता / पंचांग

