नई दिल्ली, 22 अक्टूबर: दीवाली की लक्ष्मी पूजा से पहले घर में गणेश-लक्ष्मी की स्थापना विधि-विधान से की जाती है। स्थापना के लिए सबसे पहले पूजा स्थान की साफ-सफाई करके एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। चौकी पर भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की मूर्तियां स्थापित करें — परंपरा के अनुसार गणेश जी दाईं ओर और लक्ष्मी जी बाईं ओर रखे जाते हैं। मूर्तियों के सामने जल से भरा कलश स्थापित करें, जिसमें आम के पत्ते और नारियल रखा जाता है। कलश को समृद्धि का प्रतीक माना गया है।
स्थापना के बाद षोडशोपचार पूजन किया जाता है, जिसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल, दक्षिणा, आरती, परिक्रमा और पुष्पांजलि शामिल हैं। घर में सरल विधि से भी पूजा की जा सकती है — मूर्तियों को गंगाजल से स्नान कराएं, रोली-चंदन का तिलक लगाएं, फूल और माला अर्पित करें, धूप-दीप जलाएं और मिठाई का भोग लगाएं। लक्ष्मी जी को कमल का फूल और गणेश जी को दूर्वा अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है।
पूजा में कुछ नियमों का पालन करें — पूजा स्थान पर चमड़े की वस्तुएं न रखें, दीया घी या तिल के तेल का जलाएं और पूजा के दौरान मन को शांत रखें। लक्ष्मी पूजा के साथ व्यापारी वर्ग चोपड़ा पूजन भी करता है, जिसमें नए बहीखाते की पूजा होती है। स्थापना की गई मूर्तियों का विसर्जन परंपरा अनुसार अगले दिन या सुविधानुसार किया जाता है, लेकिन कई घरों में मूर्तियां पूरे साल पूजा स्थान पर रहती हैं।
स्रोत: धार्मिक मान्यता, लोक परंपरा

