नई दिल्ली, 20 अक्टूबर: आज विजयादशमी है और इसके साथ ही नौ दिन के शारदीय नवरात्रि का समापन भी हो रहा है। घरों में स्थापित घट (कलश) का विसर्जन और देवी प्रतिमा की विदाई आज के दिन की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक क्रिया मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्रि में स्थापित कलश में समस्त देवी-देवताओं का आह्वान किया जाता है, इसलिए इसका विसर्जन विधि-विधान से करना चाहिए।
विसर्जन से पहले मां दुर्गा की आरती करें और क्षमा-याचना के साथ व्रत-उपवास की पूर्णता की प्रार्थना करें। कलश के ऊपर रखा नारियल प्रसाद के रूप में बांट दें या घर के किसी सदस्य को दे दें। कलश का जल तुलसी या किसी पवित्र पौधे में डालें, कभी भी गंदे नाले या अपवित्र स्थान पर न फेंकें। कलश में बोए गए जौ के अंकुर (जवारे) को बहते जल में प्रवाहित करें या खेत-बगीचे में रख दें।
मिट्टी या गोबर की बनी देवी प्रतिमा का विसर्जन नदी, तालाब या घर में रखे बड़े बर्तन के स्वच्छ जल में करें। विसर्जन के समय ‘ॐ देवी विसर्जनाय नमः’ का उच्चारण करते हुए मां से अगले वर्ष पुनः पधारने की प्रार्थना की जाती है। पूजा में प्रयुक्त फूल-पत्तियां भी जल में प्रवाहित करें, कचरे में न डालें। माना जाता है कि विधिवत विसर्जन से नवरात्रि का पूर्ण फल प्राप्त होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
स्रोत: धार्मिक मान्यता और पंचांग परंपरा

