नई दिल्ली, 20 अक्टूबर: दिवाली की तैयारियों में घर की सजावट के साथ मुख्य द्वार की सज्जा का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि दीपावली की रात माता लक्ष्मी घर-घर विचरण करती हैं और जिस घर का द्वार स्वच्छ, सजा और शुभ चिह्नों से युक्त होता है, वहीं वे प्रवेश करती हैं। इसलिए द्वार पर स्वास्तिक, ॐ और शुभ-लाभ बनाना केवल सजावट नहीं, धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है।
नियम के अनुसार, द्वार को पहले गंगाजल या स्वच्छ जल से धोकर पोंछ लें। फिर रोली या कुमकुम से दाईं ओर स्वास्तिक बनाएं — स्वास्तिक की भुजाएं दाईं ओर मुड़ी होनी चाहिए, क्योंकि यही शुभ स्वास्तिक कहलाता है। द्वार के दोनों ओर ‘शुभ’ और ‘लाभ’ लिखें और ऊपर ‘ॐ’ का चिह्न बनाएं। आम या अशोक के पत्तों का तोरण द्वार पर बांधना भी शुभ माना जाता है।
ध्यान रहे कि शुभ चिह्न कभी भी गंदी या टूटी सतह पर न बनाएं। स्वास्तिक बनाते समय मन में सकारात्मक संकल्प रखें। कुछ परिवारों में द्वार के दोनों ओर हल्दी से हाथ के थापे लगाने की भी परंपरा है, जो घर की रक्षा का प्रतीक मानी जाती है। माना जाता है कि विधिवत सजा द्वार नकारात्मक ऊर्जा को रोकता है और घर में धन-धान्य की वृद्धि करता है।
स्रोत: धार्मिक मान्यता और वास्तु परंपरा

