नई दिल्ली, 7 अक्टूबर: दिवाली के अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह पर्व 9 नवंबर, सोमवार को पड़ेगा (कुछ पंचांगों में 10 नवंबर भी बताया गया है)। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की लीला का स्मरण किया जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार ब्रजवासियों ने इंद्र की पूजा छोड़कर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू की थी, जिससे क्रोधित इंद्र ने मूसलाधार वर्षा की। तब श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर समस्त ब्रजवासियों और गौवंश की रक्षा की थी। तभी से प्रकृति और गौवंश के सम्मान का यह पर्व मनाया जाता है।
पूजा विधि के अनुसार घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर उसे फूलों से सजाया जाता है। इसके चारों ओर परिक्रमा कर अन्नकूट यानी तरह-तरह के पकवानों का भोग लगाया जाता है। कई घरों में 56 भोग की परंपरा भी है। इस दिन गायों की पूजा कर उन्हें गुड़-चना खिलाया जाता है। मान्यता है कि गोवर्धन पूजा से घर में अन्न-धन की कभी कमी नहीं होती। स्रोत: भागवत पुराण की कथा और लोक परंपरा

