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गुरु नानक जयंती 24 नवंबर: गुरुपर्व का महत्व, जानें प्रभात फेरी और लंगर की परंपरा

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नई दिल्ली, 22 अक्टूबर: सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व इस साल मंगलवार, 24 नवंबर को मनाया जाएगा। यह 557वां प्रकाश पर्व होगा। कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला यह पर्व सिख समुदाय का सबसे बड़ा त्योहार है, जिसे गुरुपर्व भी कहा जाता है। इस दिन गुरुद्वारों में विशेष दीवान सजते हैं और ‘इक ओंकार’ के संदेश का स्मरण किया जाता है।

गुरुपर्व की तैयारियां तीन दिन पहले से शुरू हो जाती हैं। गुरुद्वारों में 48 घंटे का अखंड पाठ साहिब रखा जाता है, जो जयंती के दिन भोग के साथ समाप्त होता है। सुबह-सुबह प्रभात फेरियां निकाली जाती हैं, जिनमें श्रद्धालु शब्द-कीर्तन गाते हुए नगर भ्रमण करते हैं। मुख्य आयोजन में नगर कीर्तन निकाला जाता है — पांच प्यारों की अगुवाई में निशान साहिब, गतका प्रदर्शन और शब्द-कीर्तन की झांकियां शामिल होती हैं।

लंगर गुरुपर्व की सबसे पवित्र परंपरा है। गुरुद्वारों में हजारों श्रद्धालुओं के लिए एक साथ भोजन तैयार होता है, जहां जाति-पाति और अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं होता — सभी एक पंक्ति में बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। गुरुद्वारों को दीयों और रोशनी से सजाया जाता है। गुरु नानक देव जी ने समानता, ईमानदारी की कमाई और नाम जपने का संदेश दिया था, और गुरुपर्व इन्हीं शिक्षाओं को जीने का अवसर माना जाता है।

स्रोत: सिख धार्मिक परंपरा