नई दिल्ली, 6 अक्टूबर: 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा है, जिसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस रात मां लक्ष्मी की विशेष पूजा होती है। मान्यता है कि इस रात देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और पूछती हैं — “को जागर्ति?”, यानी “कौन जाग रहा है?” जो भक्त इस रात जागकर देवी की आराधना करता है, उस पर लक्ष्मी की कृपा बरसती है।
शरद पूर्णिमा की सबसे प्रसिद्ध परंपरा है चांदनी में खीर रखने की। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों में अमृत का वास होता है। शाम को बनी खीर को चांदनी में रखा जाता है और रातभर चंद्र किरणें पड़ने के बाद अगले दिन सुबह उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। आयुर्वेदिक दृष्टि से भी शरद ऋतु की चांदनी को शीतल और स्वास्थ्यवर्धक माना गया है।
पूजा विधि: शाम को स्नान के बाद सफेद वस्त्र पहनकर लक्ष्मी-नारायण की पूजा करें। चांदी के पात्र में खीर बनाकर चंद्रमा को अर्पित करें और “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जप करें। इस रात जागरण और भजन-कीर्तन का भी विधान है।
कुछ क्षेत्रों में इस रात कौड़ियों से लक्ष्मी की पूजा की जाती है, क्योंकि कौड़ी को धन की देवी का प्रिय प्रतीक माना गया है। विवाहित महिलाएं इस दिन पति की लंबी उम्र के लिए भी व्रत रखती हैं। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी अपने भक्तों के घर आती हैं, इसलिए घर को साफ-सुथरा और दीपों से सजाया जाता है।
स्रोत: धार्मिक मान्यता

