नई दिल्ली, 7 अक्टूबर: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी-द्वादशी को तुलसी विवाह का पावन पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2026 में तुलसी विवाह 21 नवंबर, शनिवार को होगा। इस दिन तुलसी के पौधे का शालिग्राम (भगवान विष्णु के प्रतीक) के साथ विवाह रचाया जाता है, जो कन्यादान के समान पुण्यदायी माना जाता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार वृंदा (तुलसी) के तप और पतिव्रत धर्म से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया था कि प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास में उनका विवाह शालिग्राम के साथ कराया जाएगा। तभी से देवउठनी एकादशी के आसपास तुलसी विवाह की परंपरा चली आ रही है। इसी के साथ चातुर्मास का समापन और शुभ विवाहों के मुहूर्त की शुरुआत मानी जाती है।
विवाह विधि में तुलसी के गमले को दुल्हन की तरह लाल चुनरी, चूड़ियों और फूलों से सजाया जाता है। शालिग्राम को दूल्हे के रूप में स्थापित कर हल्दी-रोली, अक्षत और फूलों से पूजा की जाती है। इसके बाद तुलसी और शालिग्राम के सात फेरे कराए जाते हैं। मान्यता है कि तुलसी विवाह कराने वाले दंपति को संतान सुख और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। स्रोत: पौराणिक मान्यता और पंचांग

