नई दिल्ली, 6 अक्टूबर: Unified Payments Interface (UPI) के नए नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहे हैं। सबसे पहला और सबसे बड़ा सवाल — क्या आम लोगों को अब UPI Payment पर पैसे देने होंगे? जवाब है नहीं। नया नियम Merchant Discount Rate (MDR) से जुड़ा है, जो बैंक, Payment कंपनियों और दुकानदारों के बीच का मामला है। ग्राहक को सीधे कोई फीस नहीं देनी होगी।
नए नियम में UPI Payment को दो हिस्सों में बांटा गया है। P2P यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसा भेजना — चाहे कितनी भी रकम हो — पूरी तरह Free रहेगा। वहीं P2M यानी दुकान या व्यापारी को किए जाने वाले Payment पर ₹2,000 तक Zero MDR रहेगा। ₹2,000 से ऊपर के Merchant Payment पर MDR लगेगा, जो व्यापारी की Category और Transaction के हिसाब से तय होगा — अनुमान है कि यह लगभग 0.4% हो सकता है, अधिकतम ₹300 की सीमा के साथ।
यह नया Framework जनवरी 2020 से चली आ रही Zero-MDR व्यवस्था को खत्म करता है। सरकार और NPCI का कहना है कि UPI लेनदेन अरबों में पहुंच चुका है, ऐसे में Infrastructure, Cybersecurity और Dispute Handling की लागत के लिए एक छोटा Revenue Stream जरूरी हो गया था। अहम बात यह है कि कोई भी व्यापारी या ऐप MDR को ग्राहक के बिल में अलग लाइन आइटम के तौर पर नहीं दिखा सकता।
आम ग्राहकों के लिए सलाह यही है: रोजमर्रा के छोटे-बड़े Payment सामान्य तौर पर करते रहें, लेकिन बड़े खर्च पर दुकानदार से Itemized Bill जरूर मांगें ताकि अप्रत्यक्ष Surcharge से बचा जा सके।
स्रोत: NPCI द्वारा घोषित नए MDR फ्रेमवर्क और वित्तीय समाचार रिपोर्टें

