नई दिल्ली, 26 अक्टूबर: अभिनेता प्रभास की आने वाली फिल्म ‘Fauzi’ रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है। फिल्म का टीजर 23 अक्टूबर को प्रभास के जन्मदिन पर जारी हुआ था, और उसके एक दृश्य को लेकर अब नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परिजन ने आपत्ति जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, नेताजी के परिजन चंद्र कुमार बोस ने निर्देशक हनु राघवपुडी से सार्वजनिक माफी की मांग की है।
विवाद की जड़ टीजर का वह दृश्य है, जिसमें 29 मई 1942 को बर्लिन में नेताजी की एडोल्फ हिटलर से मुलाकात दिखाई गई है। इस दृश्य में नेताजी हिटलर से प्रभास के किरदार वाले काल्पनिक भारतीय जासूस के बारे में बात करते नजर आते हैं। इसमें जासूस के अभियानों का जिक्र है। चंद्र कुमार बोस का कहना है कि नेताजी और हिटलर की मुलाकात इतिहास का हिस्सा है, लेकिन काल्पनिक संवाद के जरिए उसे पेश करने से तथ्य बिगड़ते हैं।
चंद्र कुमार बोस ने कहा कि फिल्मकारों को आजादी संग्राम और उसके नेताओं को दिखाने की स्वतंत्रता है, लेकिन रचनात्मक स्वतंत्रता ऐतिहासिक सटीकता की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। उनका आरोप है कि इस दृश्य में नेताजी को एक काल्पनिक किरदार का परिचय कराते हुए दिखाया गया है, जिससे वह उस किरदार के ‘साइड कैरेक्टर’ जैसे लगते हैं। उनके मुताबिक, नेताजी हिटलर से भारत की आजादी के लिए समर्थन मांगने वाले राजनीतिक नेता के तौर पर मिले थे, न कि किसी जासूस का परिचय कराने के लिए। इसलिए इस मुलाकात को सही संदर्भ और सम्मान के साथ दिखाया जाना चाहिए था।
रिपोर्ट के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने भी इस दृश्य के दिखाए जाने के तरीके पर आपत्ति जताई है। वहीं, फिल्म के निर्माताओं की ओर से अब तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, और उनका जवाब अब प्रतीक्षित है। ‘Fauzi’ एक पीरियड वॉर-एक्शन फिल्म है, जिसका निर्देशन और लेखन हनु राघवपुडी ने किया है। यह फिल्म 19 मार्च 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है, और इसका निर्माण मैत्री मूवी मेकर्स कर रहा है।
यह पहली बार नहीं है, जब नेताजी के चित्रण पर उनके परिजनों ने आपत्ति जताई हो। रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 की फिल्म ‘गुमनामी’ के मामले में भी परिजनों ने कड़ी आपत्ति जताई थी, क्योंकि उसमें नेताजी के गुमनामी बाबा के रूप में जीवित होने के सिद्धांत को दिखाया गया था। इसी तरह 2005 की फिल्म ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस: द फॉरगॉटन हीरो’ को लेकर भी परिवार और संबंधित संगठनों की ओर से आपत्तियां सामने आई थीं। इन पुराने मामलों का जिक्र इसलिए अहम है, क्योंकि यह दिखाता है कि ऐतिहासिक किरदारों को लेकर संवेदनशीलता लंबे समय से बनी हुई है।
दर्शकों के लिए इस विवाद का मतलब यह है कि फिल्म देखने से पहले टीजर और उसके आसपास की बहस को एक ही नजर से न देखें। कोई भी फिल्म इतिहास से प्रेरित हो सकती है, लेकिन वह इतिहास की किताब नहीं होती। अगर आप ‘Fauzi’ देखने की योजना बना रहे हैं, तो नेताजी के जीवन और आजादी संग्राम के बारे में विश्वसनीय किताबों और दस्तावेजों से भी जानकारी लेना फायदेमंद रहेगा। इससे यह समझना आसान होगा कि फिल्म में क्या तथ्य है और क्या कल्पना, और किसी भी दृश्य को लेकर अपनी राय बनाना भी आसान होगा।
स्रोत: Fauzi टीजर विवाद पर समाचार रिपोर्ट्स

