7th Pay Commission–नई दिल्ली/नेशनल डेस्क: महंगाई के इस दौर में केंद्र सरकार ने अपने लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को एक बड़ी राहत दी है। केंद्र सरकार की कैबिनेट मीटिंग में महंगाई भत्ते (Dearness Allowance – DA) में 2% की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी गई है। सरकार के इस अहम फैसले से कर्मचारियों की मासिक सैलरी और पेंशनर्स की पेंशन में सीधा इजाफा होगा, जिससे बढ़ती कीमतों के बीच घर का बजट संभालने में काफी मदद मिलेगी।
58% से बढ़कर 60% हुआ महंगाई भत्ता (DA)
सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने DA में 2 फीसदी की बढ़ोतरी की है।
- इससे पहले अक्टूबर में सरकार ने DA को 55% से बढ़ाकर 58% किया था, जिसे जुलाई 2025 से लागू किया गया था।
- अब इस नई बढ़ोतरी के बाद केंद्रीय कर्मचारियों का कुल महंगाई भत्ता 60% हो गया है।
- इस फैसले का सीधा और एकमुश्त फायदा देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा। संभावना है कि बढ़ा हुआ DA एरियर (बकाया राशि) के साथ कर्मचारियों के खाते में क्रेडिट किया जाएगा।
कितनी बढ़ेगी आपकी सैलरी? (कैलकुलेशन)
कर्मचारियों को दिया जाने वाला महंगाई भत्ता उनकी बेसिक सैलरी के आधार पर तय होता है। इसे एक उदाहरण से समझते हैं कि इस 2% की बढ़ोतरी से सैलरी में कितना फर्क आएगा:
| बेसिक सैलरी (अनुमानित) | DA 58% (पुरानी दर) | DA 60% (नई बढ़ोतरी के बाद) | हर महीने सैलरी में बढ़ोतरी |
| 60,000 रुपये | 34,800 रुपये | 36,000 रुपये | 1,200 रुपये |
(यानी 60 हजार बेसिक सैलरी वाले कर्मचारी को अब हर महीने 1200 रुपये और सालाना 14,400 रुपये का अतिरिक्त फायदा होगा।)
कैबिनेट मीटिंग के अन्य बड़े और अहम फैसले
डीए बढ़ोतरी के अलावा कैबिनेट ने देश के विकास से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण फैसलों पर भी मुहर लगाई है:
- सॉवरेन मैरीटाइम फंड: जहाजों को सस्ती और स्थिर बीमा सुविधा प्रदान करने के लिए ₹13,000 करोड़ के सॉवरेन मैरीटाइम फंड का प्रावधान किया गया है।
- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY): इस योजना की अवधि को वर्ष 2028 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। साथ ही इसके लिए ₹3,000 करोड़ का अतिरिक्त बजट भी मंजूर किया गया है।
8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की मांग ने पकड़ा जोर
महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी के बीच कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग को लागू करने की अपनी मांगें भी तेज कर दी हैं।
राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) यानी NC-JCM ने सरकार को प्रस्ताव दिया है कि फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.83 किया जाए। अगर सरकार इस मांग को मान लेती है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 से बढ़कर सीधे करीब ₹69,000 हो सकती है। इसके अलावा, परिवार की परिभाषा में बदलाव, ज्यादा इंक्रीमेंट और महंगाई से जुड़ी भत्तों में सुधार की भी पुरजोर मांग की जा रही है।