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मुरादाबाद में पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच की मांग ने पकड़ा जोर, 17 दिसंबर से कार्य बहिष्कार का किया ऐलान

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मयंक त्रिगुण, वरिष्ठ संवाददाता

मुरादाबाद। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना का मुद्दा अब और जोर पकड़ता जा रहा है। इसी कड़ी में शनिवार को मुरादाबाद के दि बार एसोसिएशन एण्ड लाइब्रेरी के सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। वकीलों ने लंबे समय से चली आ रही इस मांग को लेकर गंभीर चर्चा की और बड़ा फैसला लिया।

बार एसोसिएशन की अहम बैठक का आयोजन

बैठक की अध्यक्षता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता एडवोकेट ने की। सभागार में बड़ी संख्या में अधिवक्ता जुटे थे। सबने मिलकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की जरूरत पर विस्तार से बात की। ये मांग सालों से चल रही है और अब वकील इसे और मजबूती से उठाने का मन बना चुके हैं।

17 दिसंबर को वकील करेंगे कार्य बहिष्कार

बैठक में सभी की सहमति से फैसला हुआ कि हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर 17 दिसंबर को अधिवक्ता पूरा दिन कार्य बहिष्कार करेंगे। इस दिन कोर्ट में कोई न्यायिक काम नहीं करेंगे। इससे अपनी मांग को सरकार और संबंधित अधिकारियों तक जोरदार तरीके से पहुंचाया जाएगा। वकीलों का कहना है कि ये कदम आंदोलन को नई ताकत देगा।

मुख्य अतिथि संदीप बडोला ने दिया समर्थन

कार्यक्रम में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष संदीप बडोला मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच की जरूरत पर अपने विचार साझा किए। संदीप बडोला ने कहा कि ये मांग जायज है और इसे पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने आंदोलन को पूरा समर्थन देने का वादा किया। उनकी मौजूदगी से बैठक में और जोश आ गया।

आम आदमी को हो रही भारी परेशानी

बार अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता एडवोकेट ने बैठक में चिंता जताई कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच न होने की वजह से आम जनता को बड़ा नुकसान हो रहा है। सस्ता और आसान न्याय पाने के लिए लोगों को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाना पड़ता है, जो काफी दूर है। लंबी दूरी की वजह से समय, पैसा और मेहनत तीनों बर्बाद होते हैं। इससे न्याय की प्रक्रिया आम आदमी के लिए और मुश्किल हो जाती है। गुप्ता ने कहा कि बेंच बनने से लाखों लोगों को राहत मिलेगी।

आंदोलन को और तेज करने का संकल्प

बैठक में मौजूद सभी अधिवक्ताओं ने एक साथ आवाज उठाई कि जब तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच नहीं बनती, तब तक आंदोलन चलता रहेगा। इसे और बड़ा और व्यापक बनाया जाएगा। वकीलों का इरादा साफ है – अब पीछे नहीं हटेंगे। आने वाले दिनों में और बड़े कदम उठाए जा सकते हैं, जैसे प्रदर्शन या अन्य तरीके से मांग को मजबूत करना।

ये बैठक पश्चिमी यूपी के लोगों के लिए न्याय की लड़ाई में एक नया मोड़ साबित हो सकती है। सालों से चली आ रही ये मांग अब और तेज हो रही है। देखना ये है कि सरकार इस पर कब ध्यान देती है और आम जनता को सुलभ न्याय मिलता है। फिलहाल वकील पूरी तरह एकजुट हैं और 17 दिसंबर का कार्य बहिष्कार इसकी पहली बड़ी झलक होगा।