पटना: बिहार की राजनीति के लिए आज (मंगलवार, 14 अप्रैल) का दिन बेहद ऐतिहासिक और बड़े बदलावों वाला साबित होने जा रहा है। राज्य की सत्ता पर करीब दो दशकों (20 वर्षों) तक एकछत्र राज करने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। इसके साथ ही बिहार में ‘नीतीश युग’ का अंत हो जाएगा और नए राजनीतिक समीकरणों की शुरुआत होगी। बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इस बड़े सस्पेंस से भी आज शाम तक पर्दा उठ जाएगा।
क्या है आज का पूरा शेड्यूल (Timeline)?
नए मुख्यमंत्री के ऐलान और इस्तीफे को लेकर आज दिनभर पटना में सियासी हलचल तेज रहेगी:
- सुबह 11:00 बजे: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी कैबिनेट की आखिरी और महत्वपूर्ण बैठक लेंगे। माना जा रहा है कि जाते-जाते इस बैठक में कुछ कड़े और बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
- दोपहर 2:00 बजे: केंद्रीय मंत्री और बिहार के लिए नियुक्त किए गए केंद्रीय पर्यवेक्षक शिवराज सिंह चौहान पटना पहुंचेंगे। उनकी अध्यक्षता में BJP विधायक दल की अहम बैठक होगी, जिसमें बीजेपी अपने मुख्यमंत्री के चेहरे पर मुहर लगाएगी।
- दोपहर 3:15 बजे: नीतीश कुमार राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंपेंगे। इसके साथ ही मौजूदा गठबंधन सरकार भंग हो जाएगी।
- शाम 4:00 बजे: NDA के सभी विधायकों की एक संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। इसी बैठक में नए नेता (मुख्यमंत्री) के नाम की औपचारिक घोषणा की जाएगी।
CM की रेस में कौन है सबसे आगे?
बिहार के इतिहास में यह पहली बार होने जा रहा है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कोई नेता राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठेगा।
- सम्राट चौधरी: फिलहाल मुख्यमंत्री पद के लिए वर्तमान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे मजबूती से चल रहा है। चर्चा है कि राज्य की कमान उन्हें सौंपी जा सकती है, जबकि निशांत कुमार को नया डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है।
- क्या महिला चेहरे पर लगेगा दांव? BJP हमेशा अपने चौंकाने वाले फैसलों के लिए जानी जाती है। पार्टी के भीतर ‘आधी आबादी’ (महिलाओं) को साधने के लिए किसी महिला को आगे करने पर भी गहन मंथन चल रहा है। ऐसे में तीन महिला विधायकों— श्रेयसी सिंह, धर्मशीला गुप्ता और रमा निषाद के नाम भी सुर्खियों में बने हुए हैं।
पार्टी में अंदरूनी मतभेद: हालांकि, सम्राट चौधरी सीएम पद के सबसे बड़े दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन हाल ही में पटना में उनके खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों और उनके पोस्टर फाड़े जाने की घटनाओं ने पार्टी के भीतर के मतभेदों को उजागर कर दिया है। बीजेपी नेतृत्व स्पष्ट कर चुका है कि अंतिम निर्णय केंद्रीय आलाकमान के हाथ में है, इसलिए किसी भी अप्रत्याशित और नए नाम के चुने जाने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।