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भारत की सर्विस ग्रोथ 4 महीने के टॉप पर, फिर भी नौकरियां क्यों सुस्त?

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नई दिल्ली, 4 नवंबर 2026: भारत के सेवा क्षेत्र ने अक्टूबर में चार महीने की सबसे तेज रफ्तार पकड़ी है। HSBC India Services Purchasing Managers’ Index, यानी PMI, सितंबर के 55.2 से बढ़कर अक्टूबर में 55.8 पर पहुंच गया। यह आंकड़ा बुधवार को जारी सर्वेक्षण में सामने आया। PMI में 50 से ऊपर का स्तर विस्तार का संकेत देता है, जबकि 50 से नीचे का स्तर संकुचन बताता है। इसलिए 55.8 का स्तर साफ तौर पर बताता है कि सेवा क्षेत्र में कारोबार बढ़ रहा है, हालांकि उसकी रफ्तार अभी प्रारंभिक अनुमान 56.2 से कुछ कम रही।

तेजी के पीछे घरेलू मांग सबसे बड़ा कारण

  • नया कारोबार जून के बाद सबसे तेज गति से बढ़ा, और इसकी मुख्य वजह मजबूत घरेलू ऑर्डर रहे।
  • त्योहारी मौसम और घरेलू खपत ने होटल, यात्रा, खुदरा और अन्य सेवाओं को सहारा दिया।
  • सेवा क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा हिस्सा है, इसलिए इसकी मजबूती का असर समूची वृद्धि पर पड़ता है।
  • विनिर्माण और सेवा को मिलाकर बना समग्र PMI भी अक्टूबर में 56.2 पर पहुंच गया, जो सितंबर के 55.9 से ज्यादा है।

फिर नौकरियां क्यों सुस्त पड़ीं?

सर्वेक्षण की सबसे चिंताजनक बात भर्ती की सुस्ती है। अक्टूबर में रोजगार वृद्धि लगभग ठहर गई और यह जून के स्तर के बराबर रही, जो पिछले दस महीनों में सबसे धीमी गति है। HSBC की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, कुछ सेवा कंपनियों के पास मौजूदा कर्मचारियों से ही काम चलाने की पर्याप्त क्षमता है। अधूरे काम का बोझ भी पिछले चार महीनों में तीसरी बार घटा, जिससे नई भर्ती की तत्काल जरूरत कम हुई। इसका मतलब यह नहीं है कि सेवा क्षेत्र कमजोर है, बल्कि कंपनियां अभी सतर्क होकर भर्ती कर रही हैं।

निर्यात ऑर्डर में भी नरमी क्यों आई?

  • नए निर्यात ऑर्डर की वृद्धि फरवरी 2023 के बाद सबसे धीमी रही।
  • अंतरराष्ट्रीय मांग कमजोर रही, जबकि घरेलू मांग ने इस कमी को काफी हद तक पूरा किया।
  • वैश्विक अनिश्चितता और अमेरिका के चुनावी माहौल ने विदेशी ग्राहकों को सतर्क बनाया हुआ है।
  • सेवा निर्यात में नरमी का असर आईटी और अन्य निर्यात-आधारित सेवाओं पर भी दिख सकता है।

उत्तराखंड और छोटे शहरों के लिए इसका क्या मतलब है?

सेवा क्षेत्र की मजबूती का लाभ केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रहता। पर्यटन, होटल, परिवहन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सेवाएं उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और अन्य शहरों में रोजगार से सीधे जुड़ी हैं। घरेलू मांग बढ़ने पर पर्यटन और स्थानीय सेवाओं में काम बढ़ता है। हालांकि भर्ती की सुस्ती यह भी बताती है कि युवा नौकरी खोजने वालों को कौशल और अनुभव पर ज्यादा ध्यान देना होगा। कंपनियां उन्हीं लोगों को प्राथमिकता दे रही हैं जो तुरंत काम संभाल सकें।

आगे क्या देखना होगा?

आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या घरेलू मांग की मजबूती बनी रहती है और क्या निर्यात ऑर्डर फिर से गति पकड़ते हैं। अगर विदेशी मांग सुधरती है, तो भर्ती में भी तेजी आ सकती है। फिलहाल तस्वीर मिली-जुली है: कारोबार बढ़ रहा है, लेकिन रोजगार उसी गति से नहीं बढ़ रहा। यही संतुलन भारत की सेवा अर्थव्यवस्था की अगली दिशा तय करेगा।

स्रोत: The Hindu BusinessLine, Reuters