मयंक त्रिगुण, ब्यूरो चीफ
मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश की मुरादाबाद पुलिस का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसने पूरी कानून-व्यवस्था और पुलिसिया जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के पाकबड़ा थाना पुलिस ने दो साल पहले दुनिया छोड़ चुके एक व्यक्ति को ‘शांति भंग की आशंका’ में पाबंद (धारा 107/116) कर दिया और बकायदा उसकी रिपोर्ट उपजिलाधिकारी (SDM) कोर्ट में भेज दी। इस बड़ी लापरवाही का भंडाफोड़ तब हुआ, जब मामले की सुनवाई के दौरान मृतक को अदालत में पेश होने के लिए पुकारा गया।
कोर्ट में गूंजी आवाज— ‘नरेश हाजिर हों’ जानकारी के अनुसार, एसडीएम कोर्ट में जब इस मामले की नियमित सुनवाई चल रही थी, तो अदालती कार्यवाही के दौरान आवाज लगाई गई—”नरेश हाजिर हों।” कोर्ट रूम में नरेश के नाम की पुकार सुनते ही वहां मौजूद उसके परिजन और पत्नी आगे आए। नरेश की पत्नी ने कोर्ट के सामने बेहद भारी मन से जो कहा, उसे सुनकर वहां मौजूद हर शख्स दंग रह गया। पत्नी ने कहा—“हुजूर, वह तो दो साल पहले ही बीमारी के कारण गुजर चुके हैं।”
बिना जमीनी सत्यापन के थानों में कट रही रिपोर्ट
परिजनों ने अदालत को बताया कि नरेश की दो वर्ष पूर्व एक गंभीर बीमारी के चलते मृत्यु हो चुकी है। मौत के दो साल बाद भी पुलिस द्वारा उसे इलाके के लिए खतरा (शांति भंग की आशंका) बता देना और बिना जमीनी हकीकत जाने उसकी रिपोर्ट तैयार कर कोर्ट भेज देना पुलिस की कार्यशैली की पोल खोलता है। इस खुलासे के बाद कोर्ट में मौजूद अन्य लोग और खुद प्रशासनिक अधिकारी भी सन्न रह गए।
कागजी मुस्तैदी पर उठे गंभीर सवाल
स्थानीय नागरिकों और जानकारों का कहना है कि यह घटना साबित करती है कि पुलिस थानों में बैठकर बिना किसी धरातलीय सत्यापन (Verification) के ही फाइलों को निपटा देती है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर बिना जांच किए किसी का भी नाम रिपोर्ट में शामिल कर दिया जाता है। इस बेहद संवेदनशील और हास्यास्पद लापरवाही के सामने आने के बाद अब देखना होगा कि जिले के आला अधिकारी जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर क्या दंडात्मक कार्रवाई करते हैं।