देहरादून, 28 अक्टूबर: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के लिए 2035 तक का विकास दृष्टिकोण सामने रखा है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य एक समृद्ध उत्तराखंड बनाना है, जहां गुणवत्तापूर्ण निवेश आए, स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले, सार्वजनिक सेवाएं बेहतर हों और राज्य की विरासत व संस्कृति सुरक्षित रहे। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विकास और सांस्कृतिक संरक्षण साथ-साथ चलने चाहिए, क्योंकि उत्तराखंड की पहचान उसके हिमालयी स्वरूप और तीर्थ परंपरा से जुड़ी है।
इस दृष्टिकोण की एक बड़ी कड़ी देहरादून में बना सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) का परिसर है। मुख्यमंत्री ने इसे राज्य में अपनी तरह की पहली सुविधा बताया है, जिसका मकसद सूचना प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप क्षेत्र में युवाओं के लिए नौकरियां पैदा करना है। एसटीपीआई केंद्र सरकार की संस्था है जो आईटी बुनियादी ढांचा और सॉफ्टवेयर निर्यात को बढ़ावा देती है। देहरादून में इसके परिसर से स्थानीय छात्रों और युवा उद्यमियों को अपने ही शहर में काम के अवसर मिलने की उम्मीद है, जिससे पलायन पर भी रोक लग सकती है।
मुख्यमंत्री ने जनभागीदारी शब्द पर भी विशेष जोर दिया। उनका कहना है कि विकसित उत्तराखंड का सपना तभी पूरा होगा जब नागरिक खुद विकास में सक्रिय भागीदार बनें। अच्छी शासन व्यवस्था और लगातार विकास के साथ जनता की भागीदारी को उन्होंने इस दृष्टिकोण की बुनियाद बताया। इसका मतलब है कि योजनाएं केवल सरकारी दफ्तरों से नहीं, बल्कि लोगों की जरूरतों और सुझावों से तय हों। पहाड़ी क्षेत्रों में यह बात और भी अहम हो जाती है, जहां हर गांव की परिस्थिति अलग है।
जोशीमठ जैसे भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्रों पर भी मुख्यमंत्री ने अलग से ध्यान देने की बात कही है। उन्होंने 27 अक्टूबर को कहा कि ऐसे क्षेत्रों में आपदा-रोधी निर्माण और सड़क व हेलीकॉप्टर संपर्क सुधारने का काम चल रहा है। उत्तराखंड का भूगोल ऐसा है कि सड़कें भूस्खलन से हफ्तों तक कट सकती हैं, इसलिए हेलीपैड और मजबूत निर्माण को आपातकालीन पहुंच के लिहाज से जरूरी माना जा रहा है। जोशीमठ के लोगों के लिए यह भरोसा अहम है कि उनकी सुरक्षा विकास योजनाओं के केंद्र में है।
आलोचकों का कहना है कि दृष्टिकोण दस्तावेज बनाना आसान है, असली कहानी उसके क्रियान्वयन से लिखी जाएगी। रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं में सुधार तभी दिखेगा जब योजनाएं तय समय में जमीन पर उतरें। फिर भी, 2035 का लक्ष्य राज्य को एक स्पष्ट दिशा देता है। देहरादून में आईटी परिसर, पहाड़ों में आपदा-रोधी ढांचा और जनता की भागीदारी — ये तीनों मिलकर आने वाले वर्षों में उत्तराखंड की तस्वीर तय कर सकते हैं।
स्रोत: मुख्यमंत्री के 27 अक्टूबर के संबोधन पर आधारित समाचार रिपोर्टें

