मुरादाबाद (बिलारी)। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद की बिलारी तहसील सोमवार को किसानों के भारी हंगामे और प्रदर्शन का केंद्र बन गई। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) के बैनर तले तहसील अध्यक्ष रनवीर सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने तहसील परिसर में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर डेरा डाल दिया। शांतिपूर्ण चल रहा यह धरना उस वक्त उग्र हो गया, जब एक सरकारी गाड़ी को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच ठन गई और किसानों ने सीधे हाईवे का रुख कर लिया।
एसडीएम की गाड़ी बनी विवाद की जड़, हाईवे किया जाम
धरना-प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब किसानों ने धरना स्थल के पास खड़ी एसडीएम (SDM) बिलारी की सरकारी गाड़ी को वहां से हटाने की मांग की। किसानों का आरोप था कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद वाहन को नहीं हटाया जा रहा था।
इस रवैये से नाराज होकर प्रदर्शनकारी किसान तहसील परिसर से बाहर निकल आए और बिलारी तहसील के ठीक सामने स्थित अलीगढ़-मुरादाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग (Highway) पर पहुंचकर सड़क पर बैठ गए। किसानों के चक्का जाम करते ही हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं और यातायात बुरी तरह चरमरा गया।
प्रदर्शन पर एक नज़र (Quick Facts):
| विवरण | जानकारी |
| घटनास्थल | बिलारी तहसील (मुरादाबाद) |
| संगठन | भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) |
| नेतृत्व | रनवीर सिंह (तहसील अध्यक्ष) |
| विवाद का कारण | धरना स्थल से SDM की गाड़ी न हटाना |
| प्रभावित मार्ग | अलीगढ़-मुरादाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग |
क्या हैं किसानों की प्रमुख मांगें?
धरने पर बैठे किसानों ने प्रशासन के सामने निम्नलिखित अहम मांगें रखी हैं:
- गन्ना भुगतान: मिलों पर बकाया गन्ना मूल्य का शीघ्र भुगतान कराया जाए।
- सड़क मरम्मत: जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन के लिए खोदी गई सड़कों की तत्काल मरम्मत हो।
- प्रदूषण पर रोक: तहसील क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित टायर जलाने वाली फैक्ट्रियों की जांच कर उन्हें तुरंत बंद किया जाए।
- भ्रष्टाचार पर लगाम: लेखपालों के साथ अवैध रूप से कार्य कर रहे प्राइवेट (निजी) मुंशियों को तत्काल हटाया जाए।
- अभिलेख सुधार: घरौनी और खतौनी (अंश निर्धारण) के अभिलेखों में हुई त्रुटियों को ठीक किया जाए।
- खाद वितरण: त्रुटियों के कारण खाद न मिल पाने की समस्या का समाधान कर वितरण प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।
अधिकारियों ने खुलवाया जाम, लेकिन अल्टीमेटम जारी
हाईवे जाम होने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। वे तत्काल मौके पर पहुंचे और किसानों से वार्ता की। बातचीत के बाद प्रशासन ने धरना स्थल से सरकारी वाहन को हटा लिया, जिसके बाद किसानों ने हाईवे से जाम खोल दिया और वापस तहसील परिसर लौट गए।
हालांकि, किसानों ने दो टूक स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी सभी मांगों का ठोस समाधान नहीं हो जाता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सक्षम अधिकारियों द्वारा शीघ्र वार्ता कर समस्याओं का निस्तारण नहीं किया गया, तो वे इस आंदोलन को अनिश्चितकालीन (Indefinite) रूप देने के लिए मजबूर होंगे।