नई दिल्ली, 6 अक्टूबर: आज आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है, जिसे इंदिरा एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी पितृपक्ष के भीतर पड़ती है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से पितरों को मोक्ष मिलता है और व्रती के पाप नष्ट होते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार महिष्मती नगरी के राजा इंद्रसेन बड़े धर्मात्मा थे। एक बार देवर्षि नारद उनके दरबार में आए और बताया कि उनके पिता अपने किसी पाप के कारण यमलोक में कष्ट भोग रहे हैं। नारद जी ने राजा को इंदिरा एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी। राजा ने विधि-विधान से व्रत रखा और उनके पिता को मोक्ष की प्राप्ति हुई। तभी से यह एकादशी पितरों के उद्धार के लिए विशेष मानी जाती है।
व्रत विधि: एकादशी से एक दिन पहले यानी दशमी को सात्विक भोजन करें। एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु की पूजा करें। दिनभर भगवान के नाम का जप करें और रात्रि जागरण का भी विधान है। द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराकर या दान देकर व्रत का पारण करें।
इस दिन चावल खाने से परहेज किया जाता है और तामसिक भोजन से दूर रहने की सलाह दी जाती है। पितरों के निमित्त तर्पण और दान करने से विशेष फल मिलता है।
स्रोत: धार्मिक मान्यता और पंचांग परंपरा

