नई दिल्ली, 7 अक्टूबर: दिवाली पर्व का समापन भाई दूज से होता है। वर्ष 2026 में भाई दूज 10 नवंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी (कुछ क्षेत्रों में 11 नवंबर को भी)। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाने वाला यह पर्व भाई-बहन के स्नेह और अटूट बंधन का प्रतीक है।
पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर भोजन के लिए पधारे थे। यमुना ने भाई का तिलक कर आरती उतारी और स्वादिष्ट भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भाई इस दिन बहन के हाथों तिलक कराएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा और उसकी आयु लंबी होगी। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
विधि के अनुसार बहन भाई को आसन पर बिठाकर रोली-चावल से तिलक करती है, आरती उतारती है और मिठाई खिलाती है। भाई बहन को उपहार देकर उसके सुख-समृद्धि की कामना करता है। परंपरागत रूप से तिलक दोपहर के समय किया जाता है। कायस्थ समाज में इस दिन चित्रगुप्त पूजा का भी विशेष महत्व है, जिसमें कलम-दवात की पूजा की जाती है। स्रोत: पौराणिक कथा और लोक परंपरा

