ओस्लो/नई दिल्ली, 10 अक्टूबर: नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने 9 अक्टूबर को 2026 का शांति का नोबेल पुरस्कार 85 वर्षीय दक्षिण अफ्रीकी मानवाधिकार वकील नवानेथेम “नावी” पिल्लै को देने की घोषणा की है। समिति ने कहा कि यह सम्मान शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों के लिए है, जिसमें युद्ध अपराधों और नरसंहार के अभियोजन में उन्होंने “असाधारण साहस और सत्यनिष्ठा” दिखाई।
पिल्लै का भारतीय कनेक्शन खास है — उनका जन्म 23 सितंबर 1941 को डरबन में तमिल भारतीय माता-पिता के घर हुआ था, उनके पिता बस ड्राइवर थे। रंगभेद के दौर में वे संघर्षशील वकील बनीं; 1967 में नेटाल की पहली अश्वेत महिला वकील और 1995 में दक्षिण अफ्रीका हाई कोर्ट की पहली गैर-श्वेत महिला जज बनीं। वे रवांडा ट्रिब्यूनल (ICTR) की अध्यक्ष, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की जज और 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त रहीं। फिलहाल वे ICJ में एड-हॉक जज हैं (गाम्बिया बनाम म्यांमार मामला)।
पुरस्कार की राशि 12 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (करीब 1.2 मिलियन डॉलर) है, जो 10 दिसंबर को ओस्लो में प्रदान किया जाएगा। पिल्लै ने यह पुरस्कार “अंतरराष्ट्रीय अपराधों के पीड़ितों” को समर्पित किया है। प्रतिक्रियाएं भी आईं — इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि समिति ने अपना “नैतिक दिशा-निर्देश” खो दिया है, जबकि अमेरिका ने ICC पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। उनके कुछ UN निष्कर्षों पर इजरायल ने आपत्ति जताई है, इसलिए इस खबर को संतुलित नजरिए से देखना जरूरी है।
स्रोत: Human Rights Watch, NPR (9-10 अक्टूबर 2026)

