नई दिल्ली, 15 अक्टूबर: छठ पूजा का दूसरा दिन खरना 14 नवंबर को मनाया जाएगा। खरना छठ व्रत का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है — इस दिन व्रती दिनभर निर्जला उपवास रखते हैं और शाम को विशेष भोग तैयार करके पूजा करते हैं। खरना के बाद से ही 36 घंटे के कठिन निर्जला व्रत का संकल्प शुरू हो जाता है, जो उषा अर्घ्य तक चलता है।
खरना की विधि में शाम के समय व्रती स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद मिट्टी के चूल्हे पर मिट्टी या पीतल के बर्तन में गुड़ की खीर बनाई जाती है। खीर के साथ गेहूं के आटे की रोटियां सेंकी जाती हैं। पूजा में सूर्य देव और छठी मैया का ध्यान करके यही भोग अर्पित किया जाता है। भोग लगाने के बाद व्रती स्वयं प्रसाद ग्रहण करते हैं और फिर परिवार व पड़ोसियों में प्रसाद बांटा जाता है।
मान्यता है कि खरना का प्रसाद अत्यंत पवित्र होता है और इसे ग्रहण करने से व्रत की शक्ति मिलती है। खरना के दिन घर की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है — रसोई में लहसुन-प्याज का प्रयोग नहीं होता। इस दिन के बाद व्रती अन्न-जल का पूर्ण त्याग कर देते हैं और अगले दिन संध्या अर्घ्य के लिए घाट की तैयारी होती है।
स्रोत: धार्मिक मान्यता / पंचांग

