नई दिल्ली, 24 अक्टूबर: लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा इस बार 13 नवंबर से 16 नवंबर तक मनाई जाएगी। चार दिनों तक चलने वाले इस व्रत में सूर्य देव और छठी मैया की आराधना की जाती है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के साथ-साथ अब दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर में छठ की धूम रहती है।
पहला दिन 13 नवंबर, शुक्रवार को नहाय-खाय है। इस दिन व्रती स्नान करके शुद्ध शाकाहारी भोजन करते हैं, जिसमें कद्दू की सब्जी और चने की दाल का विशेष महत्व है। दूसरा दिन 14 नवंबर, शनिवार को खरना है। इस दिन व्रती दिनभर निर्जल रहते हैं और शाम को गुड़ की खीर, रोटी और केले का प्रसाद बनाकर छठी मैया को भोग लगाते हैं, फिर यही प्रसाद ग्रहण करके 36 घंटे का निर्जल व्रत शुरू करते हैं।
तीसरा दिन 15 नवंबर, रविवार को संध्या अर्घ्य है। शाम को व्रती टोकरी में ठेकुआ, फल और गन्ना लेकर नदी या तालाब के घाट पर जाते हैं और डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। चौथा दिन 16 नवंबर, सोमवार को उषा अर्घ्य के साथ व्रत का समापन होता है। भोर में उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रती प्रसाद ग्रहण करते हैं और व्रत खोलते हैं।
छठ व्रत के नियम अत्यंत कठोर माने जाते हैं। व्रत के दौरान पूर्ण पवित्रता रखी जाती है, प्रसाद मिट्टी के नए चूल्हे पर बनाया जाता है और व्रती जमीन पर सोते हैं। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से किया गया छठ व्रत संतान सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि देता है। स्रोत: धार्मिक मान्यता

