नई दिल्ली, 27 अक्टूबर: दिवाली से पहले राज्यों के सरकारी कर्मचारियों के लिए भी बोनस की खबरें लगातार आ रही हैं। तमिलनाडु सरकार ने अपने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों के लिए बोनस और एक्स-ग्रेशिया का ऐलान किया है। राज्य सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक, बोनस और एक्स-ग्रेशिया के रूप में कुल 376.01 करोड़ रुपये की राशि 2,69,439 कर्मचारियों के बीच बांटी जाएगी। सरकार ने कहा है कि यह फैसला कर्मचारियों की मेहनत और उपक्रमों के लाभ को मान्यता देने के उद्देश्य से लिया गया है। माना जा रहा है कि यह पैसा दिवाली से पहले ही कर्मचारियों को मिल जाएगा, ताकि त्योहारों के खर्च में कोई दिक्कत न आए।
तमिलनाडु में अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग-अलग व्यवस्था बताई गई है। तमिलनाडु जल-आपूर्ति एवं ड्रेनेज बोर्ड के पात्र कर्मचारियों को 8.33 प्रतिशत बोनस मिलेगा। वहीं, तमिलनाडु नागरिक आपूर्ति निगम के अस्थायी कर्मचारियों को 3,000 रुपये का एक्स-ग्रेशिया प्रदान किया जाएगा। यानी स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों के लिए रकम तय करने का तरीका अलग है। यह अंतर इसलिए है, क्योंकि बोनस की गणना वेतन, लाभ और सेवा की शर्तों से जुड़ी होती है, जबकि एक्स-ग्रेशिया एकमुश्त सहायता के रूप में दिया जाता है।
उत्तर प्रदेश में भी लाखों कर्मचारियों की नजर बोनस पर टिकी है। सरकार ने कहा है कि इस बार दिवाली पर अधिकतम 7,000 रुपये तक बोनस दिया जाएगा। सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक, यह बोनस त्योहारों से पहले ही मिल जाने की उम्मीद है। यूपी के 14.82 लाख कर्मचारियों को इस बार दिवाली बोनस का फायदा मिलेगा। यह बोनस सरकार के अराजपत्रित कर्मचारियों को ही दिया जाएगा। यूपी के कर्मचारी संगठनों की मांग रही है कि भुगतान में देरी न हो, ताकि दिवाली की खरीदारी समय पर हो सके।
यूपी में बोनस के साथ-साथ महंगाई भत्ते को लेकर भी चर्चा तेज है। खबरों के मुताबिक, 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाने की तैयारी की बात सामने आई है, लेकिन इसका लाभ दिवाली से पहले मिलने वाले वेतन में शामिल होने की संभावना कम बताई जा रही है। इसकी वजह यह है कि अक्टूबर महीने के वेतन बिल पहले से तैयार हो चुके हैं। इसलिए बढ़े हुए भत्ते का लाभ नवंबर के वेतन के साथ दिसंबर में मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, यह सब अंतिम आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
राज्यों के बोनस में अंतर क्यों होता है, यह भी समझना चाहिए। केंद्र सरकार का बोनस एक तय फॉर्मूले से तय होता है, जबकि राज्य सरकारें अपने बजट, उपक्रमों के मुनाफे और कर्मचारियों की श्रेणी के हिसाब से फैसला लेती हैं। इसलिए किसी राज्य में 8.33 प्रतिशत बोनस मिलता है, तो किसी में एकमुश्त 7,000 रुपये तक की रकम। कर्मचारी को अपने राज्य के शासनादेश को ही अंतिम मानना चाहिए, दूसरे राज्य की खबर से अपनी रकम का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए।
कर्मचारियों के लिए सलाह यही है कि बोनस की खबर मिलते ही खर्च की योजना बनाएं, लेकिन खरीदारी उसी रकम के हिसाब से करें जो खाते में आ चुकी हो। अगर बोनस अब तक न मिला हो, तो विभाग के आदेश और वेतन अनुभाग से जानकारी लें। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही सूची या स्क्रीनशॉट को आधिकारिक आदेश समझने की गलती न करें।
स्रोत: तमिलनाडु सरकार का नोटिफिकेशन और उत्तर प्रदेश सरकार से जुड़ी समाचार रिपोर्ट

