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Moradabad BLO Suicide-BLO की पत्नी बोली 4 बेटियाँ हैं, कैसे पालूंगी पोस्टमॉर्टम नहीं होने दूंगी, पहले 5 करोड़ और नौकरी दो

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मयंक त्रिगुण, वरिष्ठ संवाददाता  

Moradabad BLO Suicide-मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक सहायक अध्यापक की पत्नी ने शव का पोस्टमॉर्टम ही रुकवा दिया। रोते-बिलखते महिला ने प्रशासन के सामने 5 करोड़ रुपये मुआवजा और पति की जगह नौकरी की मांग रख दी। मामला इतना गंभीर हो गया कि पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

“SIR फॉर्म ने मेरे पति को मार डाला”

मृतक सहायक अध्यापक का नाम सर्वेश सिंह था। वे मुरादाबाद के कंपोजिट विद्यालय जाहिदपुर भगतपुर टांडा में बतौर सहायक अध्यापक तैनात थे। साथ ही वे बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) का काम भी कर रहे थे। उनकी पत्नी बबली देवी ने मीडिया के सामने खुलकर सारी रोते हुए बताया, “मेरे पति SIR फॉर्म भरने के भारी दबाव में थे। डीएम, एसडीएम और सुपरवाइजर के मैसेज लगातार आते थे – ‘काम करो, टारगेट पूरा करो, तुम्हारा टारगेट बहुत नीचे जा रहा है’। इसी टेंशन में उन्होंने आत्महत्या कर ली।”

बबली ने आगे कहा, “वे मुझसे बार-बार कहते थे – अगर यह काम पूरा नहीं किया तो मेरे ऊपर कार्रवाई होगी, जेल भी हो सकती है।” सर्वेश ने सुसाइड नोट भी छोड़ा है जिसमें उन्होंने अपनी मजबूरी लिखी है।

“चार बेटियाँ हैं, सास हैं, कैसे पालूंगी?”

सुसाइड नोट में सर्वेश सिंह ने लिखा, “मेरी चार छोटी-छोटी बेटियाँ हैं। सास हैं। देवर-देवरानी बाहर रहते हैं। अभी किसी बच्ची की शादी भी नहीं हुई। मैं जा रहा हूँ तो ये सब कैसे जिएंगे?” यह पढ़कर बबली का दिल टूट गया। वे बार-बार बेहोश हो रही थीं और चीख रही थीं – “मेरे बच्चों का क्या होगा? ये इतनी छोटी हैं, कैसे पालूंगी?”

पोस्टमॉर्टम हाउस पर डटी रहीं, कोई अधिकारी नहीं आया

बबली ने पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर डेरा जमा लिया और शव का पोस्टमॉर्टम कराने से साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा, “जब तक मुझे 5 करोड़ रुपये मुआवजा और मेरे पति की जगह नौकरी नहीं मिल जाती, मैं पोस्टमॉर्टम नहीं होने दूंगी।” हैरानी की बात यह है कि इतना बड़ा हंगामा होने के बावजूद मुरादाबाद के डीएम, एसडीएम या किसी बड़े अधिकारी ने परिवार से मिलने तक की जहमत नहीं उठाई।

बबली ने आखिरी बार कैमरे के सामने हाथ जोड़कर कहा, “मैं मुरादाबाद के डीएम साहब, एसडीएम साहब से बस यही माँगती हूँ – मेरे बच्चों को अनाथ मत होने दो। 5 करोड़ और नौकरी दो ताकि मैं इनका पेट पाल सकूँ, पढ़ा-लिखा सकूँ।”

फिलहाल शव अभी भी पोस्टमॉर्टम हाउस में है और परिवार अपनी माँगों पर अड़ा हुआ है। प्रशासन की चुप्पी से लोगों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। देखना यह है कि आखिर इस माँ की पुकार कब सुनी जाएगी।