मयंक त्रिगुण, ब्यूरो चीफ
मुरादाबाद। मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर आञ्जनेय कुमार सिंह ने विकास और स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा बैठक में अधिकारियों की क्लास लगा दी। खासतौर पर प्राइवेट अस्पतालों द्वारा प्रसव का डेटा न देने पर वे बेहद नाराज़ हुए और सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। बैठक में मंडल के सभी जिलों की प्रगति को बारीकी से देखा गया और कई जगहों पर लापरवाही सामने आई।
कौन हुआ नाराज और क्यों?
मंडलायुक्त आञ्जनेय कुमार सिंह ने कमिश्नरी सभागार में हुई बैठक की अध्यक्षता की। यहां मुरादाबाद, बिजनौर, संभल, रामपुर और अमरोहा जिलों के अधिकारी मौजूद थे। वे सबसे ज्यादा गुस्सा प्राइवेट हॉस्पिटलों पर हुए क्योंकि इन अस्पतालों में होने वाले प्रसवों का पूरा डेटा नहीं भेजा जा रहा। मंडलायुक्त ने साफ कहा – अगर रिपोर्टिंग नहीं हुई तो लापरवाही करने वाले निजी अस्पतालों का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
कब और कहां हुई बैठक?
यह महत्वपूर्ण मंडलीय समीक्षा बैठक मुरादाबाद कमिश्नरी सभागार में हुई। इसमें विकास कार्यों के साथ-साथ स्वास्थ्य कार्यक्रमों की गहन समीक्षा की गई। अधिकारियों को जनता से जुड़ी योजनाओं को बेहतर तरीके से चलाने के सख्त निर्देश दिए गए।
क्या-क्या मुद्दों पर हुई सख्ती?
बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। सबसे पहले सीयूजी नंबर न उठाने की शिकायतों पर मंडलायुक्त नाराज़ हुए। खासकर बिजली विभाग के अधिकारियों के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायतें आईं, जिन पर तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए गए।
स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो अल्ट्रासाउंड सेंटरों को मानकों के हिसाब से चलाने के निर्देश दिए गए। आयुष्मान भारत योजना में मरीजों को सही लाभ न मिलने और गलत इलाज की शिकायतों पर सीएमओ को सख्ती बरतने को कहा गया। लापरवाही करने वाले अस्पतालों पर जुर्माना लगाने या उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी दी गई।
वेंटिलेटर और एंबुलेंस पर विशेष ध्यान
मंडलायुक्त ने अस्पतालों में मौजूद वेंटिलेटरों को पूरी तरह उपयोग में लाने को कहा ताकि गंभीर मरीजों को तुरंत मदद मिल सके। एंबुलेंस की व्यवस्था की क्रॉस चेकिंग कराने और मरीजों को समय पर एम्बुलेंस देने में कोई कोताही न बरतने के निर्देश दिए।
टीबी, फायर सेफ्टी और मां-बच्चे की सुरक्षा
टीबी मरीजों को नि:क्षय पोषण योजना के तहत पैसा न मिलने के कारणों की जानकारी ली गई। सभी अस्पतालों में फायर सेफ्टी के नियम सख्ती से लागू करने को कहा गया।
मातृत्व मृत्यु के मामलों की जिलेवार समीक्षा में आशा कार्यकर्ताओं, पंचायत सहायकों और स्थानीय निकायों से सहयोग लेकर सख्त निगरानी करने के आदेश दिए। गांवों में गर्भवती महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) की जांच और इलाज पर खास ध्यान देने को कहा गया।
प्राइवेट हॉस्पिटलों को आखिरी चेतावनी
संस्थागत प्रसव की समीक्षा में सबसे बड़ा मुद्दा प्राइवेट अस्पतालों का डेटा न देना रहा। मंडलायुक्त ने साफ कहा कि सभी निजी अस्पतालों से प्रसव की पूरी रिपोर्टिंग अनिवार्य है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो लाइसेंस रद्द करने जैसी कड़ी कार्रवाई होगी।
खाद्य सुरक्षा और गोपनीयता पर भी फोकस
खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए गए सैंपलों और मिलावटी सामान पर की गई कार्रवाई की समीक्षा हुई। लगातार सैंपल लेकर सख्त एक्शन लेने के निर्देश दिए गए। साथ ही सरकारी दफ्तरों में गोपनीयता बनाए रखने और बाहर के लोगों को दखल न देने देने पर जोर दिया।
शिकायतें और शौचालयों की हालत
आईजीआरएस पोर्टल पर आने वाली शिकायतों का सही तरीके से निपटारा न होने पर नाराजगी जताई गई। गांवों में बने सामुदायिक शौचालयों की असल स्थिति का सत्यापन कराकर उन्हें ठीक करने के आदेश दिए।
अन्य योजनाओं की भी चली क्लास
बैठक में कृषि, ग्रामीण विकास और रोजगार से जुड़ी कई योजनाओं की प्रगति देखी गई। इनमें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, फार्मर रजिस्ट्री, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), छात्रवृत्ति, मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना सहायता, गन्ना भुगतान, एनआरएलएम, ओडीओपी, युवा स्वरोजगार योजना, कौशल विकास और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना शामिल हैं। हर योजना पर जरूरी निर्देश दिए गए।
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