Uttarakhand news-‘स्टेट प्रगति पोर्टल’ से होगी हर सरकारी योजना की ट्रैकिंग, मुख्य सचिव ने दिए सख्त निर्देश

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सब-हेडलाइन: विभागों को तय करने होंगे प्रोजेक्ट्स के ‘माइलस्टोन’, धीमी प्रगति पर रखी जाएगी नजर। पिछले 3 से 5 सालों की स्वरोजगार योजनाओं का होगा विश्लेषण; स्वास्थ्य भवनों में बेसमेंट पार्किंग की गई अनिवार्य।

uttarakhand news-देहरादून: उत्तराखण्ड में विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने तथा पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। प्रदेश के मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने आज (सचिवालय में) ‘स्टेट प्रगति पोर्टल’ (State Pragati Portal) की अहम समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि अब विभागों द्वारा संचालित सभी महत्वपूर्ण राज्य-पोषित और केंद्र-पोषित योजनाओं की मॉनिटरिंग एवं समीक्षा अनिवार्य रूप से इसी पोर्टल के माध्यम से की जाएगी।

प्रोजेक्ट्स की होगी विभागवार समीक्षा, तय होंगे ‘माइलस्टोन’

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने नियोजन विभाग को निर्देश दिए कि पोर्टल के डिजाइन को इस तरह से तैयार किया जाए कि योजनाओं की विभागवार (Department-wise) और योजनावार (Scheme-wise) सटीक समीक्षा हो सके।

  • धीमी प्रगति पर लगेगी लगाम: विभागों को अपने प्रत्येक प्रोजेक्ट के निर्माण और विकास के विभिन्न स्तरों के ‘माइलस्टोन’ (Milestones) निर्धारित करने होंगे। इससे यह पता चल सकेगा कि कौन सा प्रोजेक्ट किस स्तर पर धीमा चल रहा है, ताकि उस पर नजर रखकर उसे निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जा सके।

स्वरोजगार योजनाओं का होगा 3 से 5 साल का ‘ऑडिट’

राज्य में रोजगार सृजन को लेकर मुख्य सचिव ने कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पोर्टल में सभी विभागों द्वारा संचालित स्वरोजगार योजनाओं को भी तुरंत शामिल किया जाए। सिर्फ योजनाएं चलाना काफी नहीं है, बल्कि यह विश्लेषण (Analysis) भी होना चाहिए कि इन योजनाओं के धरातल पर उतरने से अब तक वास्तविक रूप से कितना रोजगार पैदा हुआ है। इसके लिए नियोजन विभाग को पिछले 3 से 5 सालों की सभी स्वरोजगार योजनाओं का विस्तृत डेटा खंगालकर एक रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि योजनाओं की कमियों को समझा और दूर किया जा सके।

स्वास्थ्य सुविधाओं पर खास फोकस: ‘हॉलिस्टिक प्लान’ की जरूरत

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने पोर्टल का लाइव ट्रायल लेते हुए स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं की प्रगति की बारीकी से जांच की।

  • प्रदेश के विभिन्न जनपदों में बन रहे अस्पतालों, उप-जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्यों की अद्यतन स्थिति (Current Status) जानी।
  • मैनपावर और मशीनरी: उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य विभाग केवल भवन निर्माण तक सीमित न रहे, बल्कि मैनपावर (स्टाफ) की तैनाती और पुरानी मशीनों के अपग्रेडेशन को भी अपनी योजनाओं में शामिल करे। इसके लिए एक ‘हॉलिस्टिक प्लान’ (समग्र योजना) तैयार करने की आवश्यकता है।
  • पार्किंग समस्या का समाधान: नए भवनों और अस्पतालों के निर्माण में ‘बेसमेंट पार्किंग’ को अनिवार्य रूप से शामिल करने पर विशेष जोर दिया गया।

इनकी रही प्रमुख उपस्थिति: इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में शासन के कई उच्चाधिकारी मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव सचिन कुर्वे, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, और अपर सचिव सुश्री झरना कमठान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।