संभल आज सही मायनों में आजाद हुआ’: 1978 के हत्याकांड के पीड़ित परिवार को लंबे संघर्ष के बाद मिली जमीन, जानें पूरा मामला

ताजा खबरों का अपडेट लेने के लिये ग्रुप को ज्वाइन करें Join Now

संभल (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के संभल में दशकों पहले हुए एक खौफनाक हत्याकांड और दंगों के मामले में पीड़ित परिवार को अब जाकर एक बड़ा और ऐतिहासिक न्याय मिला है। साल 1978 में हुई एक क्रूर हत्या के मामले में, जहां एक शख्स को मारकर उसकी लाश कुएं में फेंक दी गई थी, उस पीड़ित परिवार को अब प्रशासन द्वारा जमीन का पट्टा सौंपा गया है। इस भावनात्मक और ऐतिहासिक मौके पर राज्य के मंत्री ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि “संभल आज सही मायनों में आजाद हुआ है।”

1978 का वह खौफनाक मंजर

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला साल 1978 के उस काले दौर से जुड़ा है जब इलाके में तनाव और हिंसा (दंगे) का माहौल था। उस दौरान दबंगों और उपद्रवियों ने एक शख्स की बेरहमी से हत्या कर दी थी और सबूत मिटाने व खौफ पैदा करने के मकसद से उसकी लाश को एक गहरे कुएं में फेंक दिया था। इस घटना के बाद से ही पीड़ित परिवार न्याय, सुरक्षा और अपने हक के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर था।

दशकों बाद मिला मालिकाना हक और जमीन

कई दशकों के लंबे संघर्ष और इंतजार के बाद, मौजूदा सरकार और प्रशासन ने इस पुराने मामले का संज्ञान लिया। ऐतिहासिक अन्याय को सुधारते हुए, प्रशासन ने मारे गए शख्स के परिवार को सम्मानपूर्वक जमीन का मालिकाना हक (पट्टा) सौंप दिया है। यह कदम उस परिवार के लिए एक बड़े भावनात्मक मरहम और आर्थिक सुरक्षा के रूप में देखा जा रहा है।

मंत्री का बड़ा बयान: ‘संभल आज आजाद हुआ’

जमीन के कागजात सौंपने के इस मौके पर मौजूद मंत्री ने वहां उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए एक बेहद कड़ा और भावुक बयान दिया। उन्होंने पिछली सरकारों के शासनकाल और उस दौर के खौफ की ओर इशारा करते हुए कहा, “अन्याय और दहशत के उस दौर का आज अंत हो गया है। दशकों तक जिस परिवार ने खौफ के साए में न्याय का इंतजार किया, आज उन्हें उनका हक मिला है। सही मायनों में संभल आज आजाद हुआ है।”

​इस फैसले के बाद स्थानीय लोगों में भी सरकार की इस कार्रवाई को लेकर सकारात्मक चर्चा है। लोगों का मानना है कि इतनी पुरानी घटना में न्याय मिलने से आम जनता का कानून और प्रशासन पर विश्वास और भी मजबूत हुआ है।