Chamoli Heavy Rain : उत्तराखंड के पहाड़ों पर एक बार फिर से कुदरत ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। लगातार हो रही भारी बारिश के चलते आम जनजीवन बुरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है और लोगों के मन में डर बैठ गया है। ताजा और बेहद डराने वाला मामला सीमांत जिले चमोली से सामने आया है, जहां बीती रात हुई मूसलाधार बारिश (Chamoli Heavy Rain) ने भारी तबाही मचाई है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि पहाड़ों से तेज बहाव के साथ बहकर आया मलबा सीधे लोगों के घरों में जा घुसा, जिससे स्थानीय निवासियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है।
असल में, अचानक आई इस आफत ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। पानी के तेज बहाव और मलबे की चपेट में आने से कई रिहायशी मकानों को नुकसान पहुंचा है। सबसे ज्यादा डराने वाली तस्वीर तो तब सामने आई जब एक मरीजों को ले जाने वाली एंबुलेंस भी इस मलबे के दलदल में बुरी तरह फंस गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, रात के वक्त अचानक तेज आवाज के साथ मलबा बस्ती की तरफ आने लगा, जिससे लोगों को संभलने तक का ठीक से मौका नहीं मिला। गनीमत यह रही कि लोगों ने समय रहते सुरक्षित स्थानों की ओर दौड़ लगा दी।
Chamoli Heavy Rain: मलबे में दबी 8 गाड़ियां, स्कूल का भी बुरा हाल
चमोली में हुई इस बारिश का खौफनाक मंजर देखकर हर कोई सहम गया है। बताया जा रहा है कि बारिश के पानी के साथ भारी मात्रा में बड़े-बड़े पत्थर और कीचड़ सीधा सड़क और रिहायशी इलाकों में आ गिरा। इस भारी मलबे की जद में आकर सड़क किनारे खड़ी लगभग 8 गाड़ियां पूरी तरह से दब गई हैं। कई कारों को देखकर तो ऐसा लग रहा है मानो वो मिट्टी में ही दफन हो गई हों।
इसके अलावा, इलाके के एक स्कूल की हालत भी बेहद खराब हो चुकी है। स्कूल के कमरों से लेकर खेल के मैदान तक में घुटनों तक कीचड़ और मलबा भर गया है। यह एक बड़ी राहत की बात रही कि यह मौसमी घटना रात के वक्त हुई। अगर दिन के समय स्कूल खुला होता और बच्चे वहां मौजूद होते, तो एक बहुत बड़ा और दर्दनाक हादसा हो सकता था। फिलहाल, स्कूल प्रबंधन और स्थानीय लोग मलबे को हटाने की जद्दोजहद में जुटे हुए हैं।
पहाड़ी जिलों के लिए मौसम विभाग का ‘यलो अलर्ट’
चमोली की इस डराने वाली घटना के बीच मौसम विज्ञान केंद्र ने एक और चिंताजनक जानकारी साझा की है। मौसम विभाग ने उत्तराखंड के कई अन्य पहाड़ी जिलों के लिए आधिकारिक तौर पर ‘यलो अलर्ट’ जारी कर दिया है। दरअसल, मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक पहाड़ों पर मौसम का मिजाज इसी तरह तल्ख रहने की आशंका है।
पहाड़ी जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश होने की प्रबल संभावना है। ऐसे में भूस्खलन (लैंडस्लाइड) और चट्टानें खिसकने का खतरा कई गुना बढ़ गया है। खासकर उन इलाकों में जो नदियों के किनारे या फिर कच्ची पहाड़ियों की तलहटी में बसे हुए हैं, वहां के लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
आपदा प्रबंधन मुस्तैद, लोगों से सावधानी बरतने की अपील
हालात की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमों को पूरी तरह से अलर्ट मोड पर रखा गया है। चमोली में जहां-जहां मलबा घुसा है, वहां जेसीबी मशीनों के जरिए रास्ते खोलने और मलबा हटाने का काम तेजी से चल रहा है।
प्रशासन ने स्थानीय निवासियों और इन दिनों चारधाम यात्रा पर आ रहे तीर्थयात्रियों से एक खास अपील की है। अधिकारियों का साफ कहना है कि जब तक मौसम पूरी तरह से साफ नहीं हो जाता, तब तक लोग सुरक्षित स्थानों पर ही रहें और गैर-जरूरी सफर, खासकर रात के समय यात्रा करने से बचें। कुल मिलाकर, उत्तराखंड में बारिश का यह दौर एक बार फिर से पहाड़ की चुनौतीपूर्ण जिंदगी को उजागर कर रहा है। ऐसे में जरूरी है कि हम कुदरत के इस बिगड़े मिजाज को हल्के में न लें और सतर्कता बनाए रखें।