नई दिल्ली, 6 अक्टूबर: छठ पूजा लोक आस्था का महापर्व है, जिसमें 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है। इस बार छठ पूजा 15-16 नवंबर को मनाई जाएगी। चार दिनों तक चलने वाले इस व्रत में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा होती है।
पहला दिन — नहाय-खाय: व्रती स्नान के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं; कद्दू-भात खाने की परंपरा है। दूसरा दिन — खरना: पूरे दिन निर्जल व्रत के बाद शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनता है; इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है। तीसरा दिन — संध्या अर्घ्य: डूबते सूर्य को बांस के सूप में ठेकुआ, फल और नारियल अर्पित किया जाता है। चौथा दिन — उषा अर्घ्य: उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण होता है।
छठ में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है — व्रत का प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर और बिना जूठे बर्तनों में बनाया जाता है। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से किया गया छठ व्रत संतान सुख और परिवार की समृद्धि देता है।
खरना के प्रसाद के बाद व्रती अगले दो दिनों तक पूरी तरह निर्जल रहती हैं — न अन्न, न जल। यही छठ व्रत की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती है। व्रत के दौरान व्रती जमीन पर सोती हैं और सात्विक दिनचर्या का पालन करती हैं। मान्यता है कि सूर्य देव की कृपा से व्रती की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
स्रोत: लोक परंपरा और धार्मिक मान्यता

