नई दिल्ली, 6 अक्टूबर: 20 अक्टूबर, मंगलवार को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग में दशहरे को सिद्ध मुहूर्त माना गया है — मान्यता है कि इस दिन किसी अलग मुहूर्त की गणना की आवश्यकता नहीं होती। गृह प्रवेश, नया वाहन खरीदना, व्यापार की शुरुआत, भूमि पूजन या किसी नए कार्य का शुभारंभ — इन सभी के लिए दशहरा साल के सबसे शुभ दिनों में गिना जाता है।
उत्तर भारत में दशहरा भगवान राम की रावण पर विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है और शाम को रावण दहन के आयोजन होते हैं। वहीं मां दुर्गा के महिषासुर पर विजय की कथा भी इसी दिन से जुड़ी है। दक्षिण और पश्चिम भारत में इस दिन आयुध पूजा होती है — किसान अपने हल-बैल, कारीगर अपने औजार और विद्यार्थी अपनी पुस्तकों की पूजा करते हैं।
दशहरे के दिन शमी के पत्ते एक-दूसरे को देने की परंपरा है, जिसे सोना बांटने जैसा शुभ माना जाता है। इस दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन भी शुभ संकेत माने गए हैं। ज्योतिषियों के अनुसार सिद्ध तिथि पर शुरू किए गए कार्यों में बाधाएं कम आती हैं।
कई व्यापारी इस दिन अपने बही-खातों की पूजा करते हैं और नया खाता शुरू करते हैं। दशहरे पर रावण दहन देखने के लिए देशभर के मेलों में भारी भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि इस दिन यात्रा शुरू करना भी शुभ होता है, इसलिए कई लोग अपने नए सफर की शुरुआत दशहरे से करते हैं।
स्रोत: पंचांग परंपरा और धार्मिक मान्यता

