नई दिल्ली, 6 अक्टूबर: 6 नवंबर को धनतेरस है, जिससे पांच दिवसीय दीपावली उत्सव की शुरुआत होती है। यह दिन भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। मान्यता है कि धनतेरस पर की गई खरीदारी घर में सुख-समृद्धि लाती है, लेकिन क्या खरीदना शुभ है और क्या नहीं — इसे लेकर भी स्पष्ट परंपराएं हैं।
शुभ मानी जाने वाली खरीदारी: सोना-चांदी, पीतल या तांबे के बर्तन, स्टील के बर्तन, झाड़ू और धनिया के बीज। झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, इसलिए धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदने की परंपरा है। धनिया के बीज खरीदकर दिवाली पर बोने से धन वृद्धि की मान्यता जुड़ी है।
क्या न खरीदें: मान्यता के अनुसार धनतेरस पर खाली बर्तन नहीं लाने चाहिए — बर्तन में थोड़ा चावल या जल भरकर लाएं। लोहे से बनी चीजें और नुकीली वस्तुएं खरीदने से भी परहेज किया जाता है। कांच के टूटने वाले सामान को भी अशुभ माना गया है।
शाम को यम के नाम का दीपक घर के बाहर दक्षिण दिशा में जलाने की परंपरा है, जिसे यम दीपदान कहा जाता है।
कुछ लोग धनतेरस पर गोमती चक्र और कौड़ी भी खरीदते हैं, जिन्हें धन वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इन छोटी चीजों को तिजोरी या पूजा स्थान में रखने की परंपरा है। मान्यता है कि धनतेरस की शाम को घर के मुख्य द्वार पर दीप जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मां लक्ष्मी का आगमन होता है।
स्रोत: धार्मिक मान्यता

